World Health Day 2026: क्या खून के रास्ते आपके दिमाग तक पहुंच रहा है नैनो प्लास्टिक? न्यूरोलॉजिस्ट ने खोले राज
News India Live, Digital Desk: विश्व स्वास्थ्य दिवस (World Health Day 2026) के मौके पर एक ऐसा मुद्दा सामने आया है, जो हमारी रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा है और बेहद खतरनाक भी है। आज प्लास्टिक हमारी जिंदगी का एक अहम हिस्सा बन चुका है। किचन के डिब्बों से लेकर ऑफिस के लंच बॉक्स और पानी की बोतलों तक, हर जगह प्लास्टिक का बोलबाला है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही प्लास्टिक टूटकर 'नैनो प्लास्टिक' में बदल जाता है और धीरे-धीरे हमारे खून के रास्ते सीधा हमारे दिमाग (Brain) तक पहुंच सकता है? फरीदाबाद के फोर्टिस अस्पताल के जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत बंगा ने नैनो प्लास्टिक के शरीर और दिमाग पर पड़ने वाले घातक प्रभावों का खुलासा किया है।
क्या होता है नैनो प्लास्टिक और कैसे पहुंचता है शरीर में? नैनो प्लास्टिक वे सूक्ष्म कण होते हैं, जो बड़े प्लास्टिक के टूटने या घिसने से बनते हैं। ये कण इतने छोटे होते हैं कि नंगी आंखों से इन्हें देखना नामुमकिन है। जब हम प्लास्टिक के बर्तनों में खाना खाते हैं या प्लास्टिक की बोतलों में पानी पीते हैं, तो ये सूक्ष्म कण सांस, पानी और भोजन के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
क्या ये दिमाग के 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' को तोड़ सकते हैं? डॉ. विनीत बंगा के अनुसार, प्रकृति ने हमारे दिमाग को हानिकारक तत्वों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच दिया है, जिसे 'ब्लड-ब्रेन बैरियर' (Blood-Brain Barrier) कहा जाता है। यह बैरियर खून में मौजूद हानिकारक टॉक्सिन्स को दिमाग तक पहुंचने से रोकता है। लेकिन कुछ हालिया रिसर्च और स्टडीज से पता चला है कि नैनो प्लास्टिक के कण आकार में इतने ज्यादा छोटे होते हैं कि वे इस मजबूत सुरक्षा कवच को भी आसानी से पार कर सीधे दिमाग में प्रवेश कर सकते हैं। हालांकि, ये कितनी मात्रा में दिमाग में जाते हैं और लंबे समय में इसका क्या असर होता है, इस पर अभी दुनिया भर के वैज्ञानिक और रिसर्च कर रहे हैं।
दिमाग पर क्या पड़ता है इसका घातक असर? न्यूरोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. बंगा बताते हैं कि जब ये नैनो प्लास्टिक के कण दिमाग की नसों और कोशिकाओं में जमा होने लगते हैं, तो इससे कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसका सबसे बड़ा साइड इफेक्ट दिमाग में सूजन (Inflammation) का आना है। इससे दिमाग की कोशिकाएं कमजोर पड़ने लगती हैं, जिसका सीधा असर व्यक्ति की याददाश्त (Memory), एकाग्रता और सोचने-समझने की क्षमता पर पड़ता है। लंबे समय में यह अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ा सकता है।
नैनो प्लास्टिक के खतरे से कैसे बचें? अपनाएं ये 4 उपाय
प्लास्टिक का विकल्प चुनें: अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक का इस्तेमाल कम से कम कर दें। ऑफिस ले जाने वाले लंच बॉक्स और घर के स्टोरेज कंटेनर्स के लिए कांच, स्टील या तांबे के बर्तनों का इस्तेमाल करना शुरू करें।
गर्म खाना प्लास्टिक में न रखें: भूलकर भी प्लास्टिक के डिब्बों में गर्म खाना न रखें और न ही माइक्रोवेव में प्लास्टिक के बर्तनों में खाना गर्म करें। गर्मी के संपर्क में आने पर प्लास्टिक से हानिकारक केमिकल्स और नैनो पार्टिकल्स तेजी से खाने में घुल जाते हैं।
पानी की बोतल बदलें: हम में से ज्यादातर लोग प्लास्टिक की बोतलों से पानी पीते हैं। इसे तुरंत बदलें। इसके बजाय स्टील, कांच या तांबे की बोतल का इस्तेमाल करें।
ब्रेन के लिए हेल्दी डाइट लें: दिमाग की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल और ड्राई फ्रूट्स शामिल करें। खासकर अखरोट और बादाम का सेवन दिमाग के लिए बहुत फायदेमंद होता है।