जेल जाएंगे या बचेंगे? जब कोर्ट ने ब्लू टिक को ही मान लिया सबूत व्हाट्सएप समन को लेकर बड़ी चेतावनी
News India Live, Digital Desk : पुरानी यादों में अगर जाएं, तो पहले कोर्ट का नोटिस लेकर एक पुलिसवाला या डाकिया आपके घर आता था। अगर आप नहीं मिले, तो वह आपके दरवाजे पर कागज चिपका देता था। लेकिन अब हम 'डिजिटल इंडिया' में जी रहे हैं। दिल्ली हाई कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट समेत कई अदालतों ने समय-समय पर ऐसे फैसले सुनाए हैं जिनसे अब व्हाट्सएप पर भेजा गया नोटिस भी पूरी तरह 'वैध' (Valid) माना जाता है।
अदालत ने 'ब्लू टिक' को क्या माना?
आपको याद होगा कुछ साल पहले एक चर्चित केस में कोर्ट ने साफ कहा था कि यदि किसी व्यक्ति को व्हाट्सएप पर समन भेजा गया है और उसमें 'ब्लू टिक' (दो नीली लकीरें) दिख रही हैं, तो यह मान लिया जाएगा कि उसने नोटिस पढ़ लिया है। यानी अब आप यह बहाना नहीं बना सकते कि "साहब, हमें तो चिट्ठी मिली ही नहीं।" यहाँ तक कि अगर आपने 'रीड रसीद' बंद कर रखी है, तब भी अदालतों के पास तकनीकी सबूतों को परखने के अपने तरीके हैं।
कानून आखिर ऐसा क्यों कर रहा है?
आजकल लोग अक्सर पुलिस या कोर्ट से बचने के लिए अपने पते बदल लेते हैं या दरवाजे पर मिलते ही नहीं हैं। इससे मुकदमे सालों-साल लटके रहते हैं। इसी देरी को खत्म करने के लिए अदालतों ने टेक्नोलॉजी का सहारा लेना शुरू किया है। Information Technology Act, 2000 की धाराएं भी डिजिटल संवाद को कानूनी मान्यता देने में मदद करती हैं।
क्या हर व्हाट्सएप मैसेज कानूनी नोटिस है?
नहीं, यहाँ थोड़ा संभलने की ज़रूरत है। इसका मतलब यह नहीं कि कल को कोई भी आपको डराने के लिए मैसेज कर दे। एक वैध कानूनी समन या नोटिस वही होगा जो:
- संबंधित अदालत या अधिकृत वकील के आधिकारिक पत्र (Letterhead) के रूप में होगा।
- इसमें प्रॉपर केस नंबर और मुहर की कॉपी अटैच होगी।
- पीडीएफ (PDF) फॉर्मेट में साफ़-साफ़ जानकारी होगी।
अगर आपको नोटिस मिले, तो क्या करें?
इसे हल्के में लेकर डिलीट करना या 'ब्लॉक' करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है। अगर वह नोटिस कोर्ट की तरफ से आया है, तो इसे नज़रअंदाज़ करना कोर्ट की अवमानना (Contempt of Court) माना जा सकता है। ऐसे में समझदारी यही है कि आप तुरंत किसी वकील से संपर्क करें और जवाब तैयार करें।