रेल की पटरी पर पत्थर क्यों होते हैं? सिर्फ एक वजह नहीं, इसके पीछे है पूरा साइंस
बचपन में जब भी हम ट्रेन से सफ़र करते थे या किसी रेलवे फाटक पर खड़े होते थे, तो एक सवाल हम सबके मन में ज़रूर आता था - आखिर रेल की पटरियों के बीच और आसपास इतने सारे नुकीले पत्थर क्यों बिछाए जाते हैं? क्या ये सिर्फ ऐसे ही डाल दिए जाते हैं या इसके पीछे कोई बड़ा कारण है?
ज़्यादातर लोगों को लगता है कि यह शायद पटरी को सुंदर दिखाने के लिए होता है, लेकिन सच तो यह है कि ये साधारण से दिखने वाले पत्थर ट्रेन के सुरक्षित सफ़र का सबसे बड़ा आधार हैं। ये सिर्फ पत्थर नहीं, बल्कि एक पूरा इंजीनियरिंग सिस्टम हैं।
इन्हें पत्थर नहीं, 'बैलास्ट' कहते हैं
सबसे पहले तो यह जान लीजिए कि इन नुकीले पत्थरों को रेलवे की भाषा में 'बैलास्ट' (Ballast) या 'गिट्टी' कहा जाता है। ये कोई आम गोल-मटोल पत्थर नहीं होते, बल्कि इन्हें खास तौर पर नुकीला और धारदार बनाया जाता है। अब सवाल यह है कि क्यों?
तो क्या काम करते हैं ये 'बैलास्ट'?
रेल की पटरी के ये 'साइलेंट हीरो' एक नहीं, बल्कि कई बड़े और ज़रूरी काम करते हैं:
1. पटरी को अपनी जगह पर कसकर पकड़ना:
आपने पटरी के नीचे सीमेंट या पहले के ज़माने में लकड़ी के लंबे-लंबे स्लीपर (Sleepers) देखे होंगे। पटरी इन्हीं पर टिकी होती है। जब हज़ारों टन वज़नी ट्रेन तेज़ रफ़्तार से गुज़रती है, तो ज़मीन पर भूकंप जैसा कंपन होता है। अगर ये पत्थर न हों, तो यह कंपन पटरी को अपनी जगह से हिला सकता है और एक भयानक हादसा हो सकता है। नुकीले होने की वजह से ये पत्थर एक-दूसरे में लॉक हो जाते हैं और स्लीपर को ज़रा भी हिलने नहीं देते।
2. ट्रेन का सारा वज़न संभालना:
ट्रेन का सारा वज़न सीधे ज़मीन पर नहीं जाता। यह वज़न पहियों से पटरी पर, पटरी से स्लीपर पर, और स्लीपर से इन पत्थरों (बैलास्ट) पर जाता है। बैलास्ट इस वज़न को एक बड़े एरिया में फैला देता है, जिससे ज़मीन पर दबाव कम पड़ता है और पटरी ज़मीन में धंसती नहीं है।
3. पानी को जमा होने से रोकना:
सोचिए, अगर पटरियों पर पत्थर की जगह मिट्टी या चिकनी ज़मीन होती तो क्या होता? बारिश का सारा पानी वहीं जमा हो जाता, कीचड़ बन जाता और पटरी के नीचे की ज़मीन कमज़ोर हो जाती। ये पत्थर पानी को आसानी से बहकर निकल जाने का रास्ता देते हैं, जिससे पटरी के नीचे हमेशा सूखा और मज़बूती बनी रहती है।
4. घास-फूस और पौधों को उगने से रोकना:
अगर पटरियों पर घास, पौधे या झाड़ियां उग जाएं, तो उनकी जड़ें पटरी के नीचे की ज़मीन को खोखला और कमज़ोर कर सकती हैं। यह नुकीले पत्थरों की परत किसी भी पौधे को वहाँ उगने ही नहीं देती, जिससे पटरी का आधार हमेशा मज़बूत बना रहता है।
तो फिर मेट्रो या बुलेट ट्रेन की पटरियों पर पत्थर क्यों नहीं होते?
यह सवाल भी आपके मन में आया होगा। दरअसल, मेट्रो या हाई-स्पीड ट्रेनों की पटरियाँ कंक्रीट के मज़बूत स्लैब पर बनाई जाती हैं, जिन्हें 'बैलास्ट-लेस ट्रैक' कहते हैं। यह तकनीक बहुत ज़्यादा महंगी होती है और इसका मेंटेनेंस भी अलग तरीके से होता है। सामान्य ट्रेनों के लिए आज भी पत्थर वाला बैलास्ट ही सबसे कारगर, सस्ता और मज़बूत विकल्प है।
तो अगली बार जब आप इन पत्थरों को देखें, तो इन्हें सिर्फ पत्थर समझने की गलती न करें, क्योंकि ये आपके सुरक्षित सफ़र के सबसे बड़े गुमनाम हीरो हैं!