सिर्फ एक पार्टी को निशाना क्यों? हेट स्पीच याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कपिल सिब्बल को फटकारा, याचिकाकर्ता पर उठाए सवाल

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News India Live, Digital Desk: हेट स्पीच (भड़काऊ भाषण) के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता और उनके वकील कपिल सिब्बल से तीखे सवाल पूछते हुए कहा कि हेट स्पीच के मामलों में केवल एक विशेष राजनीतिक दल के नेताओं को ही निशाना क्यों बनाया जा रहा है? जस्टिस ऋषिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन भट्टी की पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और इसे चयनात्मक (Selective) नहीं होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान जब वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और नेताओं के बयानों का हवाला दिया, तो पीठ ने उन्हें टोकते हुए पूछा, "आप केवल एक ही पक्ष के नेताओं के नाम क्यों ले रहे हैं? क्या हेट स्पीच सिर्फ एक तरफ से होती है?"

कोर्ट ने आगे कहा कि यदि यह जनहित याचिका है, तो इसमें निष्पक्षता होनी चाहिए। केवल एक राजनीतिक विचारधारा या पार्टी के नेताओं को चुन-चुनकर टारगेट करना याचिका की मंशा पर सवाल खड़े करता है। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि वे इस तरह की 'सिलेक्टिव' याचिकाओं को बढ़ावा नहीं देंगे।

कपिल सिब्बल की दलील और कोर्ट का रुख

कपिल सिब्बल ने दलील दी कि कुछ विशिष्ट बयानों से समाज का माहौल बिगड़ रहा है और प्रशासन उन पर कार्रवाई नहीं कर रहा है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि हेट स्पीच की परिभाषा और उस पर कार्रवाई सार्वभौमिक होनी चाहिए। बेंच ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या उन्होंने अन्य दलों के नेताओं द्वारा दिए गए विवादित बयानों को भी अपनी याचिका में शामिल किया है?

क्यों अहम है यह टिप्पणी?

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन लोगों के लिए एक बड़ा संदेश है जो अदालतों का इस्तेमाल राजनीतिक हिसाब चुकता करने के लिए करना चाहते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि न्याय की देवी की आंखों पर पट्टी जरूर है, लेकिन वह संतुलन और निष्पक्षता को प्राथमिकता देती है। फिलहाल, कोर्ट ने याचिका के दायरे को व्यापक बनाने और इसे निष्पक्ष रखने का निर्देश दिया है।