बेकसूर को सजा नहीं हो सकती सुप्रीम कोर्ट ने सौतेली बेटी की हत्या के आरोपी को किया बरी, एमिकस क्यूरी की तारीफ में पढ़े कसीदे
News India Live, Digital Desk : न्याय के मंदिर से एक ऐसा फैसला आया है जो न केवल कानून की बारीकियों को समझाता है, बल्कि यह भी बताता है कि एक वकील की मेहनत कैसे किसी मासूम की जिंदगी बचा सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने अपनी सौतेली बेटी की हत्या के आरोपी एक व्यक्ति को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने माना कि परिस्थितिजन्य साक्ष्य (Circumstantial Evidence) के आधार पर किसी को तब तक दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि गुनाह पूरी तरह साबित न हो जाए।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक व्यक्ति पर अपनी ही सौतेली बेटी की बेरहमी से हत्या करने के आरोप से जुड़ा था। निचली अदालत और हाई कोर्ट ने सबूतों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी माना था। आरोपी पिछले कई सालों से जेल की सलाखों के पीछे था। मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुँचा, तो कोर्ट ने इस पर गहराई से विचार किया कि क्या वाकई कड़ियां आपस में जुड़ रही हैं?
सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी
जस्टिस बी.आर. गवई और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष (Prosecution) की थ्योरी में कई झोल थे। कोर्ट ने स्पष्ट किया:
केवल 'सौतेला पिता' होने के आधार पर किसी को कातिल नहीं माना जा सकता।
'Last Seen' थ्योरी: कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इसलिए कि आरोपी और पीड़िता को आखिरी बार साथ देखा गया था, यह सजा देने का पर्याप्त आधार नहीं है।
सबूतों की कड़ी में 'गैप' होने पर इसका फायदा हमेशा आरोपी को मिलना चाहिए।
वकील की हुई जमकर सराहना
इस केस में सबसे खास बात रही कोर्ट द्वारा एमिकस क्यूरी (Amicus Curiae) की तारीफ। सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी की पैरवी कर रहे वकील के शोध और दलीलों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। बेंच ने कहा कि वकील ने जिस तरह से रिकॉर्ड्स को खंगाला और कानूनी कमियों को उजागर किया, वह काबिले तारीफ है। उनके प्रयासों की वजह से ही एक बेगुनाह को न्याय मिल सका।