गुरु तेग बहादुर जी पर बनी फिल्म पर क्यों मचा है बवाल? कार्टून रूप में दिखाने पर भड़के सिख संगठन, की बैन की मांग

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News India Live, Digital Desk: एक तरफ जहाँ नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर जी के महान बलिदान और मानवता के लिए दिए गए उनके संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए 'हिंद दी चादर' नाम की एक एनिमेटेड फिल्म बनाई गई है, वहीं दूसरी तरफ इस फिल्म को लेकर सिख समुदाय में ही एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) समेत कई सिख संगठनों ने इस फिल्म का कड़ा विरोध किया है और इसे तुरंत बैन करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि यह फिल्म सिख धर्म की मूल मर्यादा और सिद्धांतों के खिलाफ है।

आखिर क्यों हो रहा है इस फिल्म का विरोध?

इस पूरे विवाद की जड़ सिख धर्म की एक गहरी और अटूट मान्यता है। शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के नेता सिमरनजीत सिंह मानन ने इस पर अपनी आपत्ति जताते हुए साफ किया है कि सिख सिद्धांतों के अनुसार, किसी भी सिख गुरु, उनके परिवार के सदस्यों या पांच प्यारों (पंज प्यारे) को किसी भी जीवंत रूप में चित्रित नहीं किया जा सकता।

  • न एक्टर के रूप में, न तस्वीर में, न ही कार्टून में: यह नियम सिर्फ किसी एक्टर द्वारा किरदार निभाने पर ही नहीं, बल्कि उनकी तस्वीर बनाने या उन्हें किसी एनिमेशन/कार्टून के रूप में दिखाने पर भी लागू होता है। सिख धर्म में गुरु साहिब को 'शब्द गुरु' (गुरुबाणी) के रूप में पूजा जाता है, और उनके किसी भी शारीरिक चित्रण को मर्यादा का घोर उल्लंघन माना जाता है।

"यह भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला काम है"

नेताओं का कहना है कि फिल्म बनाने वालों ने सिख धर्म की इस संवेदनशील मर्यादा को नजरअंदाज किया है। गुरु साहिब को एक एनिमेटेड किरदार के रूप में दिखाना सिख भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने जैसा है। उन्होंने कहा कि अगर इस फिल्म को रिलीज होने दिया गया, तो इससे समाज में अशांति का माहौल पैदा हो सकता है।

सरकार और सेंसर बोर्ड से की गई अपील

सिख संगठनों ने सेंसर बोर्ड और सरकार से अपील की है कि वे इस मामले की गंभीरता को समझें और सिख समुदाय की भावनाओं का सम्मान करते हुए इस फिल्म की रिलीज पर तत्काल रोक लगाएं। उनका कहना है कि अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर किसी भी धर्म की मौलिक मान्यताओं का अपमान नहीं किया जा सकता।

यह मामला अब फिल्म बनाने वालों की रचनात्मक स्वतंत्रता और सिख समुदाय की धार्मिक आस्था के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है। अब देखना यह है कि सेंसर बोर्ड और सरकार इस पर क्या फैसला लेते हैं और क्या यह फिल्म बड़े पर्दे तक पहुंच पाएगी या नहीं।