सोने पर लोन देने वाली मुथूट फाइनेंस, अब विदेश से क्यों उधार ले रही है पैसा? जानें पूरा मामला

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जब भी हमें पैसों की अचानक जरूरत पड़ती है और कोई रास्ता नहीं सूझता, तो घर में रखा सोना याद आता है। और सोने पर लोन देने की बात हो, तो सबसे पहला नाम मुथूट फाइनेंस (Muthoot Finance) का ही जहन में आता है। यह कंपनी हमारे सोने को गिरवी रखकर हमें पैसा देती है।

लेकिन अब कहानी में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है। जो कंपनी कल तक हमें पैसा दे रही थी, अब वो खुद विदेशी बाजार में पैसा मांगने यानी उधार लेने जा रही है!

जी हां, मुथूट फाइनेंस ने ऐलान किया है कि वह विदेशी निवेशकों से 150 मिलियन डॉलर (यानी लगभग 1200 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम कर्ज जुटा रही है।

तो क्या कंपनी को हो गया है घाटा? क्या कोई टेंशन की बात है?

बिल्कुल नहीं! बल्कि यह कंपनी की बढ़ती ताकत और उसके बड़े होते सपनों का संकेत है। चलिए, इस पूरे मामले को आसान भाषा में समझते हैं।

बैंकों से लोन क्यों नहीं लिया?
कोई भी कंपनी जब उसे अपने बिजनेस को और बड़ा करने के लिए पैसे की जरूरत होती है, तो उसके पास दो रास्ते होते हैं - या तो वह भारत के बैंकों से लोन ले, या फिर विदेशी बाजारों में जाकर अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से पैसा उठाए।

मुथूट ने दूसरा रास्ता क्यों चुना?

  • सस्ता कर्ज: मुथूट फाइनेंस को यह 1200 करोड़ रुपये का कर्ज सिर्फ 6.375% की ब्याज दर पर मिल रहा है। यह शायद भारत में मिलने वाले बिजनेस लोन की दरों से कहीं ज्यादा सस्ता है।
  • बढ़ता भरोसा: जब कोई भारतीय कंपनी आसानी से विदेशी बाजार से इतना बड़ा कर्ज जुटा लेती है, तो यह दिखाता है कि दुनिया भर के बड़े निवेशकों का भारत की और उस कंपनी की ग्रोथ स्टोरी पर कितना गहरा भरोसा है।

इस पैसे का कंपनी क्या करेगी?

यह पैसा कंपनी की तिजोरी में नहीं रखा जाएगा, बल्कि इसका इस्तेमाल हमें और आपको ही लोन देने में किया जाएगा।

  • और लोन, और बिजनेस: इस नए पैसे से कंपनी अपनी तिजोरी भरेगी, ताकि जब अगली बार आप सोना लेकर उनके पास जाएं, तो वे आपको आसानी से और शायद बेहतर शर्तों पर लोन दे सकें।
  • बिजनेस का विस्तार: कंपनी इस पैसे का इस्तेमाल अपनी नई शाखाएं खोलने और अपने बिजनेस को देश के कोने-कोने तक पहुंचाने में भी करेगी।

साफ शब्दों में कहें तो, यह मुथूट फाइनेंस का एक बहुत ही स्मार्ट बिजनेस मूव है। वे विदेश से ‘सस्ता’ पैसा उठा रहे हैं और उसे भारत में अपने ग्राहकों को लोन पर देकर ‘मुनाफा’ कमाएंगे। यह उनकी बढ़ती ताकत और विस्तार की भूख को साफ-साफ दिखाता है।