भारतीय महिलाओं में क्यों जल्दी आ जाता है मेनोपॉज? एक्सपर्ट ने बताए चौंकाने वाले कारण, जानें बचाव के उपाय
News India Live, Digital Desk: मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) हर महिला के जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय महिलाओं में यह समय से काफी पहले दस्तक दे रहा है? हालिया रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो भारतीय महिलाएं अपनी उम्र के 45 से 47 साल के बीच ही मेनोपॉज के दौर से गुजरने लगती हैं, जबकि यूरोपीय और अमेरिकी महिलाओं में यह उम्र औसतन 51 से 52 वर्ष है। इस अंतर के पीछे केवल जेनेटिक्स ही नहीं, बल्कि हमारी जीवनशैली और खान-पान से जुड़े कई गहरे कारण छिपे हैं।
जल्दी मेनोपॉज होने के मुख्य कारण: एक्सपर्ट की राय
गाइनेकोलॉजी और आईवीएफ विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय महिलाओं में अर्ली मेनोपॉज (Early Menopause) के पीछे खराब पोषण एक बहुत बड़ी वजह है। बचपन से ही पोषण की कमी और शरीर में आयरन व विटामिन की कमी का सीधा असर ओवरीज (अंडाशय) की कार्यक्षमता पर पड़ता है। इसके अलावा, बढ़ता हुआ प्रदूषण, सिगरेट के धुएं का संपर्क (एक्टिव या पैसिव स्मोकिंग) और शारीरिक सक्रियता की कमी भी ओवेरियन रिजर्व को जल्दी खत्म कर देती है। मानसिक तनाव और बदलती जीवनशैली ने भी शरीर के हार्मोनल बैलेंस को बिगाड़ दिया है।
सेहत पर क्या पड़ता है इसका असर?
मेनोपॉज का समय से पहले आना केवल पीरियड्स बंद होने तक सीमित नहीं है। यह महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को अचानक कम कर देता है, जिससे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं शुरू हो सकती हैं। इनमें हड्डियों का कमजोर होना (ऑस्टियोपोरोसिस), हृदय रोगों का खतरा बढ़ना और अचानक गर्मी महसूस होना (हॉट फ्लैशेस) शामिल हैं। इसके साथ ही, कई महिलाओं को चिड़चिड़ापन, नींद की कमी और एंग्जायटी जैसी मानसिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।
बचाव और सावधानियां: कैसे रखें अपना ख्याल?
विशेषज्ञों का कहना है कि मेनोपॉज को रोका नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ आदतों के जरिए इसके दुष्प्रभावों को कम जरूर किया जा सकता है। महिलाओं को अपनी डाइट में कैल्शियम, विटामिन-डी और प्रोटीन से भरपूर चीजों को शामिल करना चाहिए। नियमित व्यायाम और योग न केवल वजन को नियंत्रित रखते हैं, बल्कि हार्मोनल संतुलन बनाए रखने में भी मदद करते हैं। अगर 40 साल से पहले पीरियड्स में अनियमितता या मेनोपॉज के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए ताकि समय रहते हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) या अन्य उपचारों पर विचार किया जा सके।