RCB's big Decision : भुवी को छोड़ना क्यों पड़ा और सिराज क्यों हैं टीम की जान
News India Live, Digital Desk: RCB's big Decision : आईपीएल में खिलाड़ियों को टीम में रोकना या उन्हें छोड़ना हमेशा से एक बड़ी पहेली रही है. हाल ही में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) ने अपने कुछ पुराने खिलाड़ियों को लेकर जो फैसले लिए, उस पर खूब चर्चा हुई. खास तौर पर मोहम्मद सिराज को बनाए रखना और अनुभवी भुवनेश्वर कुमार को न रोक पाना. अब RCB के क्रिकेट निदेशक, मो बोबाट ने इस पूरी रणनीति का खुलासा किया है कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया.
भुवनेश्वर को लाने की चाहत, पर नहीं बनी बात
मो बोबाट ने बताया कि जब नीलामी (ऑक्शन) हो रही थी, तब उनकी टीम भुवनेश्वर कुमार को अपनी टीम में लाने के लिए काफी उत्सुक थी. उन्हें भुवी की गेंदबाजी बहुत पसंद थी और वे चाहते थे कि वो RCB का हिस्सा बनें. लेकिन अफसोस, वे अपनी कोशिश में कामयाब नहीं हो पाए. कई बार ऐसा होता है कि आपकी चाहत कुछ और होती है, पर बजट और दूसरे खिलाड़ियों की उपलब्धता आपको उस खिलाड़ी को खरीदने नहीं देती. नीलामी में ऐसे मौके हाथ से निकल जाते हैं और यही भुवी के साथ भी हुआ.
सिराज पर क्यों जताया पूरा भरोसा?
बात अगर मोहम्मद सिराज की करें, तो टीम ने उन्हें अपने साथ बनाए रखने का एक पुख्ता इरादा किया था. मो बोबाट के मुताबिक, टीम की रणनीति थी कि वे अपने उन खिलाड़ियों को साथ रखें, जो टीम के लिए लंबे समय से अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं और जिनके साथ उनका तालमेल भी शानदार है. सिराज, इस मामले में RCB के लिए एक बहुत अहम खिलाड़ी रहे हैं. उन्होंने लगातार बेहतरीन प्रदर्शन किया है और नई गेंद के साथ-साथ डेथ ओवरों में भी उनकी गेंदबाजी लाजवाब रही है. टीम ने उन्हें 'कोर प्लेयर' यानी मुख्य खिलाड़ी के तौर पर देखा और इसलिए उन्हें अपने साथ बरकरार रखा.
पैसे और स्क्वाड का संतुलन था चुनौती
दरअसल, किसी भी टीम के लिए नीलामी के वक्त सबसे बड़ी चुनौती होती है 'पर्स' (कुल पैसे) और 'स्क्वॉड' (टीम के खिलाड़ियों) का संतुलन बनाना. आपके पास खिलाड़ियों पर खर्च करने के लिए एक निश्चित रकम होती है, और उसी में आपको हर डिपार्टमेंट (बैटिंग, बॉलिंग, ऑलराउंडर) के लिए अच्छे खिलाड़ी खरीदने होते हैं. ऐसे में कुछ कड़े फैसले लेने पड़ते हैं, जहाँ एक बेहतरीन खिलाड़ी को छोड़ना पड़ता है ताकि आप किसी और डिपार्टमेंट को मजबूत कर सकें या फिर दूसरे 'कोर प्लेयर्स' को अपने साथ रख सकें. बोबाट ने साफ किया कि ऐसा नहीं है कि कोई एक खिलाड़ी दूसरे से बेहतर है, बल्कि ये सब टीम की ज़रूरत और संतुलन के हिसाब से तय होता है.
तो अब जब मो बोबाट ने सारी बातें खोल दी हैं, तो शायद क्रिकेट फैंस RCB की रणनीति को बेहतर समझ पाएंगे कि कैसे वे अपनी टीम बनाते वक्त हर पहलू का ध्यान रखते हैं.