मंदिर में क्यों हमेशा साथ दिखते हैं हनुमान जी और भैरव बाबा? जानें इसके पीछे का गहरा रहस्य
News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म में हनुमान जी और भैरव बाबा, दोनों को ही अत्यंत शक्तिशाली और संकटमोचक देवता माना गया है। अक्सर जब आप किसी प्राचीन मंदिर या सिद्ध पीठ के दर्शन करने जाते हैं, तो आपने गौर किया होगा कि जहां भैरव बाबा की प्रतिमा होती है, वहां हनुमान जी भी विराजमान होते हैं। विशेषकर मां दुर्गा के शक्तिपीठों और वैष्णो देवी जैसी पवित्र यात्राओं में इन दोनों महाशक्तियों की उपस्थिति अनिवार्य मानी जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि बल, बुद्धि के देवता हनुमान जी और तंत्र-मंत्र के अधिष्ठाता भैरव बाबा का साथ होने का आध्यात्मिक रहस्य क्या है?
शिव के अंश और रक्षक का मेल
हनुमान जी को भगवान शिव का ग्यारहवां रुद्रावतार माना जाता है, जो असीम बल और अटूट भक्ति के प्रतीक हैं। वहीं, भैरव बाबा को भी शिव का ही एक उग्र रूप और तंत्र विद्या का महान ज्ञाता माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये दोनों देव अपने भक्तों को अभय प्रदान करते हैं। जहां हनुमान जी भक्तों के शारीरिक और मानसिक संकटों को हरते हैं, वहीं भैरव बाबा नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत और तंत्र बाधाओं को जड़ से मिटा देते हैं। इन दोनों का साथ होना भक्त को 'पूर्ण सुरक्षा कवच' प्रदान करता है।
मां दुर्गा के द्वारपाल और सहायक
हनुमान जी और भैरव बाबा के एक साथ होने का सबसे गहरा संबंध आदिशक्ति मां दुर्गा से जुड़ा है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भैरव बाबा मां दुर्गा के प्रमुख सेवक और द्वारपाल हैं। उनके बिना शक्ति की पूजा अधूरी मानी जाती है। दूसरी ओर, धर्म की रक्षा और दुष्टों के संहार के लिए हनुमान जी को भी मां दुर्गा के सहायक के रूप में देखा जाता है। यही कारण है कि मां के हर सिद्ध मंदिर के पास इन दोनों महाशक्तियों की उपस्थिति भक्त के कल्याण और सुरक्षा को सुनिश्चित करती है।
वैष्णो देवी की यात्रा और दर्शन का महत्व
माता वैष्णो देवी की यात्रा इस गहरे संबंध का सबसे बड़ा प्रमाण है। मान्यता है कि माता के दर्शन तब तक सफल नहीं माने जाते, जब तक श्रद्धालु भैरव बाबा और हनुमान जी के दर्शन न कर लें। परंपराओं के अनुसार, कटरा से लेकर भवन तक की यात्रा में हनुमान जी माता की रक्षा के लिए उनके साथ चले थे, और अंत में भैरव बाबा को माता ने मोक्ष की प्राप्ति के लिए अपने दर्शन के बाद अनिवार्य पूजा का वरदान दिया था।
भक्तों को मिलता है दोहरा आशीर्वाद
मंदिरों में इन दोनों की प्रतिमाएं साथ होने का एक उद्देश्य यह भी है कि भक्त को एक ही स्थान पर भक्ति और शक्ति का संगम मिल सके। हनुमान जी की पूजा से जहां आत्मविश्वास और बुद्धि बढ़ती है, वहीं भैरव बाबा की शरण में जाने से शत्रु बाधा और अकाल मृत्यु का भय समाप्त हो जाता है। तंत्र शास्त्र में भी इन दोनों देवों की संयुक्त उपासना को अत्यंत फलदायी और शीघ्र फल देने वाला बताया गया है।