जब प्यार बना जान का दुश्मन... 16 साल की लड़की की मौत ने खड़े किए शारीरिक संबंधों की 'सही उम्र' पर गंभीर सवाल
किशोरावस्था का वह नाजुक दौर, जहां भावनाएं अक्सर समझदारी पर हावी हो जाती हैं। लेकिन कभी-कभी, इसी मासूमियत में हुई एक छोटी सी भूल या एक गलत कदम का अंजाम इतना भयानक होता है, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। बिहार से एक ऐसी ही दिल को झकझोर कर रख देने वाली खबर सामने आई है, जिसने हर मां-बाप को चिंता में डाल दिया है।
यहां एक 16 साल की नाबालिग लड़की की अपने बॉयफ्रेंड से मिलने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। यह दर्दनाक घटना सिर्फ एक प्रेम प्रसंग का दुखद अंत नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के सामने एक बहुत ही गंभीर और असहज सवाल खड़ा कर गई है - आखिर शारीरिक संबंध (Physical Relation) बनाने की सही उम्र क्या है?
क्या थी यह पूरी घटना?
मामला बिहार के एक गांव का है, जहां एक 16 साल की लड़की अपने बॉयफ्रेंड से मिलने के लिए गई थी। जब वह काफी देर तक घर नहीं लौटी, तो परिवार वालों ने खोजबीन शुरू की। बाद में, लड़की की लाश मिली, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। परिवार वालों ने लड़के पर गंभीर आरोप लगाए हैं, और पुलिस इस मामले की हत्या और आत्महत्या, दोनों एंगल से जांच कर रही है।
यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर क्यों किशोर इस तरह के जानलेवा रिश्तों में उलझ जाते हैं और इसके पीछे की असली वजह क्या है।
तो क्या है फिजिकल रिलेशन की 'सही उम्र'? कानून और विज्ञान क्या कहते हैं?
यह सिर्फ एक नंबर का सवाल नहीं है, बल्कि यह कानूनी, शारीरिक और मानसिक, तीनों तरह की परिपक्वता (Maturity) से जुड़ा हुआ है।
1. कानूनी नजरिया (The Legal Age):
- भारत में, शारीरिक संबंधों के लिए सहमति की उम्र (Age of Consent) 18 साल है।
- इसका सीधा और सख्त मतलब यह है कि 18 साल से कम उम्र के किसी भी व्यक्ति के साथ, चाहे उसकी 'हां' ही क्यों न हो, शारीरिक संबंध बनाना एक गंभीर अपराध है, और इसके लिए पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है।
2. शारीरिक नजरिया (The Physical Age):
- डॉक्टरों के अनुसार, लड़कियों का शरीर 18 साल की उम्र से पहले शारीरिक संबंधों और खासकर गर्भावस्था के लिए पूरी तरह से तैयार नहीं होता है।
- कम उम्र में संबंध बनाने से यौन संचारित रोगों (STIs) और इंफेक्शन का खतरा बहुत ज्यादा होता है।
3. मानसिक और भावनात्मक नजरिया (The Mental & Emotional Age):
- यह सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। क्या एक 15-16 साल का किशोर शारीरिक संबंधों के भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक परिणामों को समझने के लिए तैयार है?
- क्या वह सहमति का सही मतलब, रिश्ते की जिम्मेदारी, और गर्भनिरोध जैसे गंभीर विषयों को समझने की परिपक्वता रखता है? ज्यादातर मामलों में, इसका जवाब 'नहीं' होता है। इस उम्र में लिए गए फैसले अक्सर सिर्फ भावनाओं के बहाव में लिए जाते हैं, जिनका अंजाम बाद में बहुत पीड़ादायक हो सकता है।