तेजस्वी के विधायकों ने किया इशारा, तो भड़क गए सीएम नीतीश, सरेआम कह दी चुभने वाली बात

Post

News India Live, Digital Desk : बिहार की राजनीति में Nitish Kumar कब पलटी मार जाएं, इस पर दुनिया भर के मीम्स (Memes) बनते हैं। लोग सुबह उठते ही चेक करते हैं कि सीएम साहब आज किस खेमे में हैं। लेकिन इस बार विधानसभा सत्र के दौरान जो हुआ, उसने सबको हैरान कर दिया है। जो लोग कयास लगा रहे थे कि "चाचा फिर भतीजे (तेजस्वी) के पास जा सकते हैं," उनको नीतीश कुमार ने अपनी उंगली दिखाकर और चिल्लाकर ऐसा जवाब दिया है कि अब शायद वो दोबारा पूछने की हिम्मत नहीं करेंगे।

मामला गरमागर्म है, चलिए आपको एकदम आसान भाषा में बताते हैं कि सदन के अंदर ऐसा क्या हुआ कि 'शांत' रहने वाले नीतीश बाबू इतना भड़क गए।

विपक्ष की हूटिंग और सीएम का गुस्सा

कहानी की शुरुआत विधानसभा की कार्यवाही के दौरान हुई। विपक्षी दल RJD (Rashtriya Janata Dal) के विधायक अपनी आदत के मुताबिक हंगामा कर रहे थे। बीच-बीच में कुछ विधायक इशारों-इशारों में या तंज कसते हुए नीतीश कुमार की तरफ देख रहे थे, मानो कह रहे हों "आ जाइए महाराज, पुरानी बात भूल जाते हैं।"

बस यही बात सीएम नीतीश को नागवार गुज़री। वो अपनी सीट से खड़े हुए और विपक्ष की तरफ हाथ झटकते हुए चिल्ला पड़े।

"गलतफहमी में मत रहना"

नीतीश कुमार ने पूरे सदन के सामने, ऑन-रिकॉर्ड आरजेडी विधायकों को खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने साफ़-साफ़ शब्दों में कहा मेरी तरफ क्या देख रहे हो? ये याद रखना, अब मैं तुम्हारे साथ कभी नहीं जाऊंगा। कभी नहीं! ये बात दिमाग में बैठा लो।"

उनका लहजा इतना सख्त था कि एक पल के लिए पूरा सदन शांत हो गया। नीतीश ने आरजेडी के पुराने शासनकाल (जिसे वो अक्सर जंगलराज कहते हैं) की याद दिलाते हुए कहा कि जब तुम लोग सत्ता में थे, तब बिहार का क्या हाल था? शाम होते ही लोग घर से नहीं निकलते थे। हमने आकर (NDA के साथ) इस राज्य को सुधारा है।

2005 से पहले क्या था?

गुस्से में लाल नीतीश कुमार ने विपक्ष को आईना भी दिखाया। उन्होंने कहा कि "तुम लोग हल्ला कर रहे हो, लेकिन 2005 से पहले बिहार में क्या था? न सड़क थी, न बिजली, न कानून। ये सब हमने और बीजेपी ने मिलकर ठीक किया है। इसलिए अब दोबारा तुम्हारे साथ जाने का सवाल ही नहीं पैदा होता।"

सियासी संदेश: NDA के साथ 'फेविकोल' का जोड़?

इस घटना के बाद एक बात तो शीशे की तरह साफ़ हो गई है नीतीश कुमार फिलहाल BJP और PM Modi का साथ छोड़ने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं। जिस तरह से उन्होंने पीएम मोदी की तारीफ की और आरजेडी को लताड़ा, उससे लगता है कि वो 'पल्टूराम' वाले ताने से तंग आ चुके हैं और अब अपनी छवि 'स्थिर' करना चाहते हैं।

विपक्षी विधायक, जो शायद उम्मीद कर रहे थे कि नीतीश थोड़ा नरम पड़ेंगे, उन्हें इस "सख्त इनकार" की उम्मीद नहीं थी।

पब्लिक क्या सोच रही है?

सोशल मीडिया पर इस बयान की क्लिप्स घूम रही हैं। समर्थक कह रहे हैं "शेर ने दहाड़ दिया है," वहीं विरोधी कह रहे हैं "राजनीति है साहब, यहाँ 'कभी नहीं' का मतलब भी कुछ और हो सकता है।" खैर, भविष्य का तो पता नहीं, लेकिन आज के लिए नीतीश कुमार ने विपक्ष के 'हार्ट' पर 'नो एंट्री' का बोर्ड लगा दिया है।