जब अंतरिक्ष में सेहत ने दे दिया धोखा ,नासा ने क्यों बीच में ही मिशन रोककर यात्रियों को वापस बुलाया?

Post

News India Live, Digital Desk : कल्पना कीजिए, आप एक ऐसी जगह हैं जहाँ न कोई बड़ा अस्पताल है, न ऑक्सीजन की खुली हवा, और न ही भागकर मदद मांगने का रास्ता। अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) एक ऐसा ही 'आधुनिक चमत्कार' है, जहाँ वैज्ञानिक महीनों तक रहकर शोध करते हैं। लेकिन हाल ही में यहाँ सब कुछ सामान्य नहीं रहा।

क्या है पूरा मामला?
नासा ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह अपने 'क्रू-11' मिशन के सदस्यों को तय समय से पहले धरती पर वापस ला रहा है। इसकी सबसे बड़ी और इकलौती वजह एक 'मेडिकल इमरजेंसी' बताई जा रही है। हालांकि, नासा ने अभी तक उस वैज्ञानिक के नाम या बीमारी का खुलासा नहीं किया है जिसकी वजह से यह कदम उठाना पड़ा, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह फैसला काफी गंभीर हालात में लिया गया है।

इतना बड़ा कदम क्यों?
अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने (Zero Gravity) की वजह से शरीर पर बहुत गहरा असर पड़ता है। हड्डियों का कमजोर होना, विज़न (नजर) की समस्या और हृदय से जुड़ी दिक्कतें वहां आम हैं। लेकिन जब नासा मिशन के बीच में ही कैप्सूल भेजने और वापसी की तैयारी करने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि मामला मामूली बुखार या सर्दी-खांसी का नहीं है। स्पेस में कोई भी ऑपरेशन या सर्जरी करना लगभग नामुमकिन है, इसलिए 'वापसी' ही आखिरी रास्ता बचता है।

चुनौतियों भरी वापसी
कहना आसान है कि "वापस आ जाओ", लेकिन स्पेस स्टेशन से वापस धरती के वायुमंडल में प्रवेश करना एक जानलेवा सफर होता है। अत्यधिक दबाव और घर्षण (Friction) के बीच बीमार यात्री को सुरक्षित लाना नासा की मेडिकल और इंजीनियरिंग टीम के लिए बहुत बड़ी परीक्षा है। पूरा कंट्रोल रूम इस वक्त मिशन मोड पर है ताकि वापसी के दौरान बीमार सदस्य की हालत और ज्यादा न बिगड़े।

वैज्ञानिकों के लिए चिंता की लहर
क्रू-11 के अन्य सदस्यों पर भी इस घटना का भावनात्मक असर पड़ता है। एक साथी की तकलीफ और मिशन का अधूरा रह जाना, अंतरिक्ष यात्रियों के मनोबल को हिला देता है। लेकिन जैसा कि नासा हमेशा कहता है—"वैज्ञानिक शोध से ऊपर इंसान की जान है।"

अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि 'क्रू-11' कब और कैसे सुरक्षित रूप से समंदर या जमीन पर लैंड करता है। हम सब भी उनके सुरक्षित लौटने की कामना करते हैं