बिक्रम सिंह मजीठिया की ज़मानत का क्या होगा? हाई कोर्ट के नए अपडेट से बढ़ी अकाली दल की राजनीतिक मुश्किलें

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News India Live, Digital Desk : जब किसी बड़े राजनीतिक दल का प्रमुख नेता कानूनी शिकंजे (Legal Trouble) में हो, तो उस पार्टी की राजनीति और चुनाव की रणनीति पर इसका सीधा असर पड़ता है। पंजाब में शिरोमणि अकाली दल (Shiromani Akali Dal / SAD) के दिग्गज नेता बिक्रम सिंह मजीठिया (Bikram Singh Majithia) के मामले में भी कुछ ऐसा ही चल रहा है। ज़मानत (Bail) पर उनका कानूनी भविष्य क्या होगा, इस पर अब एक नया अपडेट सामने आया है।

क्या है कोर्ट का नया अपडेट?

ख़बर है कि बिक्रम सिंह मजीठिया (Bikram Singh Majithia Drug Case) की ज़मानत याचिका (Bail Plea) पर चल रही सुनवाई अभी भी पूरी नहीं हुई है। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट (Punjab and Haryana High Court) ने इस पर फिलहाल अपना अंतिम फ़ैसला सुरक्षित नहीं रखा है, बल्कि सुनवाई की अगली तारीख (Next Hearing Date) दी है। यह फ़ैसला, अकाली दल के लिए कुछ हद तक राजनीतिक सस्पेंस (Political Suspense) और अनिश्चितता को बनाए रखने वाला है।

दरअसल, यह मामला पंजाब में चल रहे कथित ड्रग्स केस (Punjab Drugs Case) से जुड़ा है, जिसमें मजीठिया मुख्य रूप से आरोपी हैं। यह केस पंजाब की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा (Major Political Issue in Punjab) रहा है, और इसीलिए इस पर कोर्ट का फ़ैसला सभी के लिए बेहद अहम है।

अकाली दल के लिए क्यों अहम है यह ज़मानत?

बिक्रम सिंह मजीठिया, अकाली दल में एक मजबूत राजनीतिक आधार रखते हैं और उन्हें पार्टी की पंजाब विधानसभा रणनीति (SAD Assembly Election Strategy) के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ज़मानत न मिलने या मामले में कानूनी उलझन बने रहने से, न केवल पार्टी के मनोबल पर, बल्कि उनके चुनाव प्रचार (Election Campaign) और संगठन पर भी दबाव बढ़ता है। 

फिलहाल सबकी निगाहें अब हाई कोर्ट द्वारा दी गई अगली सुनवाई की तारीख (Majithia Next Hearing Date) पर टिकी हुई हैं। यह मामला, आने वाले समय में पंजाब की राजनीति और अकाली दल के भविष्य (Future of Akali Dal in Punjab) को सीधे तौर पर प्रभावित करने वाला है। कानून की कसौटी (Legal Examination) पर मजीठिया किस तरह से ख़ुद को साबित कर पाते हैं, ये तो वक्‍त ही बताएगा।

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