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April 24 2026 05:53 pm

West Bengal Election : ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच आर और पार की जंग, क्या इस बार बदलेगा समीकरण?

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त पारा अपने चरम पर है। चुनावी रणभेरी बजते ही राज्य में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक तरफ जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ कभी उनके करीबी रहे और अब भाजपा के दिग्गज नेता शुभेंदु अधिकारी ने मोर्चा खोल दिया है। बंगाल के इस सियासी संग्राम में अब हर कदम पर रोमांच और सस्पेंस बना हुआ है।

ममता बनर्जी का मास्टरस्ट्रोक और भाजपा की घेराबंदी

तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने साफ कर दिया है कि वह अपनी 'माटी और मानुष' की राजनीति से पीछे हटने वाली नहीं हैं। जनसभाओं में ममता लगातार केंद्र सरकार पर हमलावर हैं। उन्होंने भाजपा पर बंगाल की संस्कृति को नष्ट करने और केंद्रीय एजेंसियों (ED और CBI) के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। ममता का कहना है कि बंगाल की जनता बाहरी लोगों को कभी स्वीकार नहीं करेगी। वहीं, भाजपा ने इस बार 'मिशन बंगाल' के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, जिससे मुकाबला काफी कड़े होने की उम्मीद है।

शुभेंदु अधिकारी की ललकार: 'नंदीग्राम की तरह होगा हाल'

भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को सीधी चुनौती देते हुए कहा है कि इस बार बंगाल में बदलाव निश्चित है। शुभेंदु का दावा है कि राज्य की जनता भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति से ऊब चुकी है। उन्होंने कई रैलियों में यह दोहराया है कि जिस तरह नंदीग्राम में ममता को हार का सामना करना पड़ा था, वैसे ही इस बार उनकी पूरी पार्टी का सफाया हो जाएगा। शुभेंदु की आक्रामक शैली ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है।

राहुल गांधी की एंट्री और त्रिकोणीय मुकाबले की सुगबुगाहट

इस चुनावी घमासान के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मौजूदगी ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। हालांकि बंगाल में मुख्य मुकाबला टीएमसी और भाजपा के बीच ही देखा जा रहा है, लेकिन कांग्रेस और वामदलों का गठबंधन कुछ सीटों पर खेल बिगाड़ने की ताकत रखता है। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दों को उठाकर युवाओं को साधने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि यह त्रिकोणीय संघर्ष किसे फायदा पहुँचाता है और किसे नुकसान।

ग्राउंड रिपोर्ट: क्या कहता है जनता का मूड?

बंगाल के ग्रामीण इलाकों से लेकर कोलकाता की गलियों तक, चर्चा सिर्फ इसी बात की है कि आखिर ताज किसके सिर सजेगा? एक तरफ दीदी की कल्याणकारी योजनाएं जैसे 'लक्ष्मी भंडार' महिलाओं के बीच लोकप्रिय हैं, तो दूसरी तरफ विकास और रोजगार के मुद्दे पर भाजपा युवाओं को आकर्षित कर रही है। मतदान के दिन करीब आते ही सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी गई है ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके। बंगाल के इस चुनावी महासमर का परिणाम न केवल राज्य बल्कि देश की भावी राजनीति की दिशा भी तय करेगा।