अमेरिका के बिना हम खुद को बचा नहीं सकते, NATO के नए बॉस ने क्यों मानी अपनी कमजोरी?
News India Live, Digital Desk : यूरोप के सबसे बड़े सैन्य संगठन NATO के होने वाले नए मुखिया ने एक ऐसी बात कह दी है, जिसने पूरी दुनिया, खासकर यूरोपीय देशों में खलबली मचा दी है। नीदरलैंड के प्रधानमंत्री मार्क रूट, जो जल्द ही NATO के अगले महासचिव बनने वाले हैं, ने खुलेआम यह स्वीकार किया है कि अगर अमेरिका साथ छोड़ दे, तो यूरोप अपने दम पर अपनी रक्षा करने में सक्षम नहीं है।
यह बयान उस वक्त आया है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी की आहट से ही यूरोप की नींद उड़ी हुई है।
आखिर उन्होंने ऐसी चौंकाने वाली बात क्यों कही?
दरअसल, यह पूरा मामला डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी से जुड़ा है जिसमें उन्होंने कहा था कि जो NATO देश अपनी रक्षा पर पर्याप्त खर्च नहीं करते, अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा। NATO का एक नियम है कि सभी सदस्य देशों को अपनी कुल कमाई (GDP) का कम से कम 2% हिस्सा अपनी सेना और रक्षा पर खर्च करना चाहिए। लेकिन जर्मनी और फ्रांस जैसे कई बड़े देश भी सालों से यह लक्ष्य पूरा नहीं कर पाए हैं।
ट्रंप इसी बात से नाराज़ हैं। उनका तर्क सीधा है - जब यूरोप खुद अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है, तो अमेरिका अकेले क्यों सबका बोझ उठाए?
"ट्रंप के बारे में रोना बंद करो और पैसे खर्च करो!"
मार्क रूट ने यूरोपीय देशों को कड़वी हकीकत का आईना दिखाते हुए कहा, "हमें डोनाल्ड ट्रंप के बारे में शिकायत करना बंद कर देना चाहिए और अपनी रक्षा पर ज़्यादा खर्च करना शुरू कर देना चाहिए।"
उनका संदेश साफ था:
- शिकायत करने से कुछ नहीं होगा: रूट ने कहा कि अगर ट्रंप चुनाव जीतते हैं तो हमें उनके साथ काम करना होगा। उनके बारे में रोने-धोने से कोई फायदा नहीं है।
- यूक्रेन युद्ध एक सबक है: उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध ने दिखा दिया है कि यूरोप को अपनी सुरक्षा को गंभीरता से लेने की कितनी ज़रूरत है।
साफ है कि ट्रंप की वापसी का डर यूरोप को सता रहा है। मार्क रूट का बयान सिर्फ एक चेतावनी नहीं, बल्कि एक 'वेक-अप कॉल' है। यह यूरोप के लिए एक संकेत है कि अब उन्हें अपनी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी खुद उठानी होगी, क्योंकि अमेरिका का साथ हमेशा बना रहेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है।