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March 16 2026 09:21 pm

WB Election 2026 : महिला या अल्पसंख्यक? ममता बनर्जी के लिए कौन बनेगा सबसे बड़ा सियासी कवच जानें TMC का विनिंग फॉर्मूला

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News India Live, Digital Desk: पश्चिम बंगाल की राजनीति में 'दीदी' के नाम से मशहूर ममता बनर्जी ने पिछले कई चुनावों में यह साबित किया है कि उनका आधार स्तंभ राज्य की महिला आबादी और अल्पसंख्यक समुदाय है। 2026 के चुनावों में भाजपा की बढ़ती सक्रियता के बीच TMC अपनी इस अभेद्य दीवार को और मजबूत करने में जुटी है।

1. महिला वोटर: 'लक्ष्मी भंडार' का जादू

ममता बनर्जी ने महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए कई जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं, जिनमें सबसे प्रमुख है 'लक्ष्मी भंडार'

साइलेंट वोटर: बंगाल में महिलाएं 'साइलेंट वोटर' मानी जाती हैं जो भारी संख्या में TMC के पक्ष में मतदान करती रही हैं।

कल्याणकारी योजनाएं: कन्याश्री, रूपाश्री और स्वास्थ्य साथी जैसी योजनाओं ने महिलाओं के बीच ममता बनर्जी की छवि को एक 'अभिभावक' की तरह स्थापित किया है।

सुरक्षा और सम्मान: 'दीदी' खुद एक महिला मुख्यमंत्री हैं, जिसे वे महिला सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में पेश करती हैं।

2. अल्पसंख्यक वोट बैंक: अभेद्य किला

बंगाल की करीब 30 प्रतिशत आबादी अल्पसंख्यक है, जो चुनाव नतीजों को तय करने में निर्णायक भूमिका निभाती है।

एंटी-बीजेपी नैरेटिव: भाजपा के ध्रुवीकरण की राजनीति के जवाब में अल्पसंख्यक समुदाय अक्सर एकजुट होकर TMC को वोट देता रहा है।

मजबूत पकड़: मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में TMC की पकड़ का मुख्य कारण यही वोट बैंक है।

3. चुनौतियां: भाजपा की काट और आंतरिक मुद्दे

ममता बनर्जी के इन दो मजबूत 'कवचों' के सामने कुछ बड़ी चुनौतियां भी हैं:

संदेशखाली जैसा विवाद: महिलाओं से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विपक्षी दल (BJP) सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं।

मुस्लिम वोटों का बंटवारा: ISF (इंडियन सेकुलर फ्रंट) और कांग्रेस-वामदल गठबंधन अगर मुस्लिम वोटों में सेंध लगाते हैं, तो TMC की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।