क्या हम अकेले नहीं थे? 26 लाख साल पुराने दांत ने खोला इंसानी इतिहास का सबसे बड़ा राज!
हम सबने स्कूलों में पढ़ा है कि हम 'होमो सेपियन्स' के वंशज हैं, और हमारे पूर्वज धीरे-धीरे बंदरों से इंसान बने। लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि लाखों साल पहले, जब हमारे पूर्वज धरती पर अपने कदम जमा रहे थे, तब उनके साथ-साथ इंसानों की एक और, बिल्कुल अनजान प्रजाति भी रह रही थी?
इतिहास की किताबों को हमेशा के लिए बदल देने वाली एक ऐसी ही खोज अफ्रीका के इथियोपिया में हुई है। वैज्ञानिकों को इंसानी दांतों का एक जीवाश्म (fossil) मिला है, जो कोई मामूली दांत नहीं है, बल्कि यह 26 लाख (2.6 मिलियन) साल पुराना है! और इस खोज का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि यह दांत न तो हमारे किसी ज्ञात पूर्वज का है और न ही किसी बंदर की प्रजाति का।
तो फिर यह है कौन?
यह खोज उस पहेली की तरह है जिसने वैज्ञानिकों को भी चकरा कर रख दिया है। इथियोपिया के 'अफारे रीजन', जिसे 'मानव जाति का पालना' भी कहा जाता है, में मिला यह दांत इंसानी विकास की कहानी में एक नया और रहस्यमयी अध्याय जोड़ रहा है।
- क्यों है यह इतना खास? अब तक माना जाता था कि उस दौर में सिर्फ हमारे जीनस 'होमो' (Homo) के शुरुआती सदस्य ही मौजूद थे। लेकिन यह नया जीवाश्म बताता है कि उसी समय, उसी जगह पर इंसानों की एक और समानांतर प्रजाति भी मौजूद थी, जिसके बारे में हमें आज तक कुछ भी नहीं पता था।
- किससे मिलता-जुलता है यह दांत? यह दांत आज के इंसानों की तरह भी है और हमारे पुराने पूर्वजों (जैसे 'आस्ट्रेलोपिथेकस') से भी कुछ मामलों में मिलता है, लेकिन पूरी तरह से किसी से भी मैच नहीं करता। इसका अनोखा आकार और संरचना ही इसे एक बिल्कुल नई प्रजाति का सबसे बड़ा सबूत मान रही है।
खुलेंगे इंसानी विकास के नए पन्ने
यह सिर्फ एक दांत नहीं, बल्कि टाइम मशीन में मिला एक ऐसा सुराग है जो हमें हमारे अतीत की एक बिल्कुल नई तस्वीर दिखा रहा है। यह खोज हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा 'फैमिली ट्री' उतना सीधा-सरल नहीं है जितना हम समझते थे। शायद यह एक बहुत घने पेड़ की तरह है, जिसकी कई ऐसी शाखाएं हैं जिनके बारे में हमें अभी जानना बाकी है।
वैज्ञानिक अब इस जीवाश्म का और गहराई से अध्ययन कर रहे हैं, ताकि इस "अज्ञात मानव प्रजाति" के और रहस्यों से पर्दा उठाया जा सके। यह खोज हमें याद दिलाती है कि हम अपने ही इतिहास के बारे में कितना कम जानते हैं, और धरती के गर्भ में अभी न जाने ऐसे कितने ही राज दफन हैं।