War Horror: AI की एक गलती और बिछ गईं 175 लाशें ईरान के स्कूल पर गिरी अमेरिकी मिसाइल
News India Live, Digital Desk : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में तकनीक की एक छोटी सी चूक ने मानवता को शर्मसार कर दिया है। ईरान के मिनाब (Minab) शहर में एक स्कूल पर हुई घातक मिसाइल स्ट्राइक में कम से कम 175 लोगों की मौत हो गई है, जिनमें बड़ी संख्या में मासूम बच्चे और शिक्षक शामिल हैं। इस घटना ने पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया है।
AI की वो गलती जिसने ले ली सैकड़ों जानें शुरुआती जांच और रक्षा विशेषज्ञों के विश्लेषण के मुताबिक, यह हमला अमेरिका की एक उन्नत मिसाइल प्रणाली द्वारा किया गया था जो AI-आधारित टारगेट रिकग्निशन (लक्ष्य पहचान प्रणाली) का उपयोग करती है। अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के सूत्रों का कहना है कि मिसाइल का असल निशाना पास ही स्थित एक भूमिगत हथियार डिपो था। लेकिन तकनीकी खराबी या 'AI एल्गोरिदम एरर' के कारण सिस्टम ने स्कूल की इमारत को सैन्य ठिकाना समझ लिया और उस पर 'प्रिसिजन स्ट्राइक' कर दी।
खून से सने बस्ते और मलबे में तब्दील बचपन मिनाब के इस स्कूल में हमले के वक्त क्लास चल रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि अचानक हुए धमाके से पूरी इमारत जमींदोज हो गई। मलबे से अब तक 175 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि कई अन्य घायल अस्पताल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर है और वे इसे 'जानबूझकर किया गया नरसंहार' करार दे रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय में आक्रोश इस त्रासदी के बाद मानवाधिकार संगठनों ने युद्ध में स्वायत्त हथियारों (Autonomous Weapons) और AI के इस्तेमाल पर सवाल उठा दिए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे एक गंभीर युद्ध अपराध की श्रेणी में रखा है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं, ईरान ने जवाबी कार्रवाई की कसम खाते हुए इसे 'अमेरिकी आतंकवाद' का सबसे नग्न रूप बताया है।
क्या तकनीक बन गई है भक्षक? यह घटना इस बहस को फिर से जिंदा करती है कि क्या युद्ध के मैदान में इंसानी विवेक की जगह मशीनी एल्गोरिदम को देना सुरक्षित है? विशेषज्ञों का मानना है कि AI की 'पहचान की गलती' ने साबित कर दिया है कि युद्ध की मशीनें कभी भी इंसानी संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकतीं।