War Alert : ईरान-अमेरिका तनाव के बीच जयशंकर की बड़ी पहल, ईरानी विदेश मंत्री को 3 बार किया फोन
News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल घने होते जा रहे हैं। ईरान और इजरायल के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत की आशंकाओं के बीच भारत ने अपने नागरिकों और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए कूटनीतिक घेराबंदी शुरू कर दी है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री के साथ तीन दौर की वार्ता की है, जो भारत की बढ़ती चिंताओं को दर्शाती है।
बातचीत के 3 मुख्य एजेंडे:
समुद्री सुरक्षा (Shipping Security): होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और लाल सागर (Red Sea) में भारतीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जयशंकर ने ईरान से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि भारतीय जहाजों को किसी भी तरह के हमले या जब्ती (Seizure) का सामना न करना पड़े।
तनाव कम करने की अपील (De-escalation): भारत ने साफ किया है कि इस क्षेत्र में किसी भी तरह का पूर्ण युद्ध (Full-scale War) वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेषकर तेल की कीमतों के लिए विनाशकारी होगा। भारत ने ईरान को संयम बरतने की सलाह दी है।
भारतीय नागरिकों की सुरक्षा: ईरान और खाड़ी देशों में रह रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चर्चा हुई है। भारत ने इमरजेंसी इवैक्यूएशन (Evacuation) प्लान के मद्देनजर कूटनीतिक रास्ते खुले रखे हैं।
भारत का रुख: विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया है कि भारत एक महत्वपूर्ण व्यापारिक शक्ति है और समुद्र में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इससे पहले भी जयशंकर अमेरिका और खाड़ी देशों के विदेश मंत्रियों से भी बात कर चुके हैं।
युद्ध का असर: ईरान द्वारा इजरायल पर संभावित हमलों की खबरों के बीच वैश्विक तेल बाजार पहले ही अस्थिर हो चुका है। भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से आयात करता है, इसलिए यह कूटनीतिक बातचीत भारत की 'ऊर्जा सुरक्षा' के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।