वोट उत्तराखंड में और विकास उत्तर प्रदेश में? टिहरी गढ़वाल की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह का आगरा प्रेम चर्चा में
News India Live, Digital Desk: अक्सर राजनीति में कहा जाता है कि जनता अपने प्रतिनिधि को इसलिए चुनती है ताकि उनके इलाके की सड़कें चमकें, स्कूलों का सुधार हो और उनके जीवन में बदलाव आए। लेकिन कभी-कभी ऐसी खबरें आती हैं जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर देती हैं। ताजा मामला उत्तराखंड की टिहरी गढ़वाल लोकसभा सीट से जुड़ा है। यहां की सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह इन दिनों अपनी 'सांसद निधि' के खर्च को लेकर चर्चा (और विवाद) में हैं।
मामला यह है कि सांसद महोदया ने अपनी सांसद निधि से करीब 1 करोड़ रुपये की बड़ी रकम टिहरी या उत्तराखंड में नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में खर्च करने की सिफारिश की है। जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, टिहरी के स्थानीय गलियारों और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छिड़ गई है।
सवाल वही अपनों को छोड़कर परायों पर मेहरबानी क्यों?
वैसे तकनीकी रूप से देखें तो सांसद निधि के नियमों में ऐसी व्यवस्था है कि एक सांसद अपनी पूरी निधि का एक निश्चित हिस्सा (करीब 25 लाख या कुछ परिस्थितियों में ज्यादा) अपने क्षेत्र से बाहर भी दे सकता है, लेकिन 1 करोड़ की भारी-भरकम राशि दूसरे जिले, और वह भी दूसरे राज्य में खर्च करना कम ही देखा जाता है। बताया जा रहा है कि यह पैसा आगरा के किसी विशेष कार्य के लिए प्रस्तावित किया गया है।
टिहरी के लोगों का क्या कहना है?
टिहरी गढ़वाल के पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोग अक्सर खराब सड़कों, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और शिक्षा की चुनौतियों से जूझते हैं। ऐसे में उनके मन में यह सवाल उठना वाजिब है कि "अगर हमारी सांसद के पास बजट था, तो वह हमारे गाँव या हमारी समस्याओं को हल करने में क्यों नहीं लगा?" आगरा जैसे बड़े शहर, जहाँ पहले से ही काफी विकास निधि मौजूद रहती है, वहां 1 करोड़ की यह मदद लोगों को समझ नहीं आ रही है।
क्या है राजनीतिक एंगल?
विपक्ष के नेताओं ने तो अब इस मुद्दे को भुनाना शुरू कर दिया है। इसे सीधे तौर पर 'टिहरी की जनता का अपमान' बताया जा रहा है। हालांकि, अभी तक सांसद की ओर से इस पर कोई बड़ी आधिकारिक सफाई नहीं आई है कि आगरा को ही क्यों चुना गया और वहां के किस काम को इतनी प्राथमिकता दी गई।
अंत में, यह मामला राजनीति और नैतिकता की एक नई बहस को जन्म दे चुका है। जनता हमेशा ये याद रखती है कि मुश्किल समय में किसने उनका साथ दिया और किसके पैसे कहाँ खर्च हुए। अब देखना यह है कि आगरा प्रेम की ये कहानी आने वाले समय में टिहरी की राजनीति में क्या रंग लाती है।