इनकम टैक्स की पुरानी बचत अब इतिहास बनेगी? सेक्शन 80C और HRA में बड़े बदलाव की तैयारी
News India Live, Digital Desk: महीने की शुरुआत में जब बैंक में सैलरी आने का मैसेज आता है, तो चेहरे पर ख़ुशी होती है, लेकिन जैसे ही टैक्स कटौती (TDS) पर नज़र जाती है, दिल थोड़ा बैठ सा जाता है। हम मिडिल क्लास वाले पूरे साल बस इसी जुगत में लगे रहते हैं कि कैसे अपनी मेहनत की कमाई का एक हिस्सा टैक्स में कटने से बचा सकें। इसके लिए सेक्शन 80C और HRA (मकान किराया भत्ता) हमेशा से हमारे सबसे बड़े हथियार रहे हैं।
लेकिन, अब बाज़ारों और एक्सपर्ट्स के बीच एक चर्चा तेज़ है कि सरकार टैक्स कटौती और निवेश से जुड़े नियमों में कुछ बड़े बदलाव करने जा रही है। अगर आप भी पुराने टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) के भरोसे अपनी बचत प्लान करते हैं, तो ये बातें आपके लिए जानना बहुत ज़रूरी हैं।
क्या 80C की लिमिट अब बढ़ेगी या कम होगी?
पिछले कई सालों से हम 1.5 लाख रुपये की वही घिसी-पिटी लिमिट देख रहे हैं। पीपीएफ (PPF), लाइफ इंश्योरेंस और ईएलएसएस (ELSS) जैसे निवेश इसी के दायरे में आते हैं। अब चर्चा है कि नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को बढ़ावा देने के लिए सरकार पुराने रिजीम के फायदों को थोड़ा सीमित कर सकती है। या फिर दूसरी तरफ, मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए इस लिमिट को बढ़ाया भी जा सकता है। हकीकत जो भी हो, असर आपकी जेब पर पड़ना तय है।
HRA क्लेम करना अब नहीं होगा इतना आसान?
मकान किराया यानी HRA के जरिए टैक्स बचाना उन लोगों के लिए बहुत बड़ा सहारा होता है जो किराये के घर में रहते हैं। लेकिन अब टैक्स विभाग दस्तावेज़ों की जांच (Verification) में काफी सख़्ती दिखा रहा है। कई बार हम सिर्फ़ रेंट रिसीप्ट लगा देते हैं, पर अब मकान मालिक का पैन कार्ड (PAN) और रेंट एग्रीमेंट जैसे सबूतों पर ज्यादा ज़ोर दिया जा रहा है। अगर आप भी 80C और HRA में हेर-फेर कर टैक्स बचाने की सोच रहे हैं, तो सावधान रहिये, क्योंकि सिस्टम अब काफी स्मार्ट हो चुका है।
न्यू बनाम ओल्ड रिजीम: एक बड़ी उलझन
ज्यादातर लोग अब इस कशमकश में हैं कि उन्हें पुरानी व्यवस्था में रहना चाहिए जहाँ डिडक्शन का फायदा मिलता है, या नई व्यवस्था में जाना चाहिए जहाँ टैक्स रेट्स कम हैं लेकिन कोई छूट नहीं है। जानकारों का कहना है कि सरकार धीरे-धीरे छूट वाली व्यवस्था (Deductions) को खत्म कर एक 'सिंपल' टैक्स स्ट्रक्चर लाना चाहती है। ऐसे में आपके लिए ये समझना ज़रूरी है कि आपका निवेश आपके टैक्स ब्रैकेट के हिसाब से कितना फायदेमंद है।
कुल मिलाकर, आने वाले दिनों में टैक्स रिटर्न फाइल करना और टैक्स बचाना थोड़ा पेचीदा हो सकता है। मेरी सलाह यही है कि आख़िरी व़क्त का इंतज़ार न करें और अपने निवेश को इन संभावित बदलावों के हिसाब से अभी से प्लान कर लें।