लोकतंत्र में विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष लाएगा अविश्वास प्रस्ताव राहुल गांधी के माइक ऑफ विवाद

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News India Live, Digital Desk: संसद के बजट सत्र का नवां दिन (9 फरवरी 2026) भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे बड़े सियासी टकरावों में से एक का गवाह बना। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर हुई विपक्षी दलों की बैठक के बाद यह तय किया गया कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया जाएगा। विपक्ष का कहना है कि अब पानी सिर के ऊपर जा चुका है।

विवाद के 5 मुख्य कारण (Key Reasons for Unrest)

राहुल गांधी को बोलने से रोकना: विपक्ष का आरोप है कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जब चीन सीमा विवाद (पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे की किताब का संदर्भ देते हुए) पर बोलना चाह रहे थे, तो उन्हें बार-बार टोका गया और अंततः उनका भाषण बीच में ही रुकवा दिया गया।

'माइक ऑफ' और पक्षपात का आरोप: कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि जब भी विपक्ष का कोई बड़ा नेता खड़ा होता है, उनका माइक बंद कर दिया जाता है, जबकि सत्तापक्ष के सदस्यों को आपत्तिजनक टिप्पणियों के बावजूद पूरा समय मिलता है।

महिला सांसदों पर टिप्पणी: स्पीकर द्वारा पीएम मोदी की सुरक्षा को लेकर कांग्रेस की महिला सांसदों पर की गई टिप्पणी से विपक्ष बेहद नाराज है। महिला सांसदों ने इसे "निराधार और अपमानजनक" बताते हुए स्पीकर को पत्र भी लिखा है।

8 सांसदों का निलंबन: हाल ही में विपक्ष के 8 सांसदों को सदन से निलंबित किए जाने की घटना ने आग में घी डालने का काम किया है।

पीएम का सदन में न आना: स्पीकर द्वारा पीएम मोदी को "सुरक्षा कारणों" से सदन में न आने की सलाह देने वाले बयान को विपक्ष ने पीएम को चर्चा से बचाने का एक बहाना बताया है।

संवैधानिक प्रक्रिया: कैसे हटते हैं लोकसभा अध्यक्ष? (Article 94c)

लोकसभा अध्यक्ष को हटाने की प्रक्रिया सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव से थोड़ी अलग और जटिल होती है:

नोटिस: इसके लिए कम से कम 14 दिन का पूर्व नोटिस देना अनिवार्य है।

सहमति: प्रस्ताव पेश करने के लिए सदन के कम से कम 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है।

बहुमत: अध्यक्ष को उनके पद से हटाने के लिए लोकसभा के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत (Effective Majority) की आवश्यकता होती है।

विपक्ष की रणनीति और सरकार का रुख

विपक्ष जानता है कि संख्या बल (Numbers) के मामले में एनडीए (NDA) मजबूत है और यह प्रस्ताव गिर सकता है। हालांकि, विपक्ष का उद्देश्य इसे प्रतीकात्मक विरोध के रूप में इस्तेमाल करना है ताकि देश के सामने यह संदेश दिया जा सके कि संसद में उनकी बात नहीं सुनी जा रही। वहीं, बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या और अन्य नेताओं ने विपक्ष पर 'सदन की कार्यवाही जानबूझकर बाधित करने' का आरोप लगाया है।