Vishnu Bhakti : यह सिर्फ व्रत नहीं, यह ब्रह्मांड का एक दिव्य संयोग है, त्रिस्पर्शा एकादशी का आध्यात्मिक रहस्य

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News India Live, Digital Desk: हम अक्सर व्रत-त्योहारों को बस एक धार्मिक परंपरा की तरह निभाते हैं। लेकिन कुछ दिन ऐसे होते हैं जो सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि ब्रह्मांड में घट रही एक दुर्लभ खगोलीय घटना का प्रतीक होते हैं। 'त्रिस्पर्शा एकादशी' एक ऐसा ही दिव्य संयोग है, एक ऐसा 'कॉस्मिक अलाइनमेंट' है, जिसका साधक और योगी सालों तक इंतज़ार करते हैं।

यह कोई हर साल आने वाली एकादशी नहीं है। यह एक दुर्लभ अवसर है जब प्रकृति और ईश्वर आपको अपनी आत्मा को शुद्ध करने का सबसे शक्तिशाली मौका देते हैं।

तीन दैवीय तिथियों का संगम

इसका नाम 'त्रिस्पर्शा' इसीलिए है क्योंकि यह तीन दिव्य तिथियों के मिलन का दिन है:

  • द्वादशी: तुलसी जी को समर्पित, सेवा और पवित्रता का दिन।
  • त्रयोदशी: भगवान शिव की संध्या (प्रदोष) का आरंभ, पापों को नष्ट करने का समय।

जब यह तीनों तिथियां एक ही सूर्योदय से अगले सूर्योदय के बीच स्पर्श करती हैं, तो ऊर्जा का एक ऐसा वृत्त बनता है जिसमें की गई प्रार्थना, मंत्र जाप या उपवास सीधे आपके सूक्ष्म शरीर पर प्रभाव डालता है। यह दिन शरीर को नहीं, बल्कि आत्मा को शुद्ध करने का होता है।

यह एक 'आध्यात्मिक रीसेट बटन' की तरह है

पुराणों में इसे हज़ार एकादशियों के बराबर क्यों कहा गया है? क्योंकि इसका प्रभाव इतना गहरा होता है। इसे आप एक 'स्पिरिचुअल रीसेट बटन' की तरह समझ सकते हैं।

  • पितरों को मुक्ति: इस दिन किया गया व्रत और दान सिर्फ आपको ही नहीं, बल्कि आपके पितरों को भी शांति और मुक्ति दिलाता है।
  • मन की शुद्धि: इस दिन उपवास रखने और 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करने से मन शांत होता है, इच्छाएं नियंत्रित होती हैं और आत्मा अपने असली स्वरूप के करीब आती है।

इसलिए, त्रिस्पर्शा एकादशी जब भी आए, इसे सिर्फ एक और व्रत की तरह न देखें। इसे ईश्वर का एक दुर्लभ निमंत्रण समझें, एक ऐसा मौका जो शायद जीवन में कुछ ही बार मिलता है, अपनी आत्मा को धोने और उसे मोक्ष के मार्ग पर एक लंबी छलांग दिलाने का।