विराट कोहली और वो अनमिट प्यास रवि शास्त्री की नज़र से एक गहरी सीख
News India Live, Digital Desk: भारतीय क्रिकेट में आजकल एक से बढ़कर एक टैलेंटेड खिलाड़ी आ रहे हैं। उनके शॉट्स देखने लायक होते हैं और उनमें कॉन्फिडेंस की भी कोई कमी नहीं है। लेकिन इसके बावजूद, दुनिया आज भी विराट कोहली के नाम की कसमें क्यों खाती है? इसी सवाल का जवाब दिया है टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री ने।
रवि शास्त्री ने युवाओं को चेताते हुए कहा है कि कोहली के अंदर जो 'सिंगल-माइंडेडनेस' (यानी किसी भी कीमत पर सिर्फ अपने लक्ष्य पर टिके रहने की जिद) और 'भूख' है, उसे नज़रअंदाज़ करना अगली पीढ़ी के लिए बहुत बड़ी गलती होगी।
टैलेंट अपनी जगह, 'धून' अपनी जगह
शास्त्री का कहना बहुत सीधा और सच्चा है। आजकल के खिलाड़ियों के पास बेहतरीन तकनीक है, वे मॉडर्न क्रिकेट के माहिर हैं, लेकिन कोहली के अंदर वो जो एक चीज़ है हमेशा खुद को साबित करने और टीम को जिताने की ज़िद'—वो दुर्लभ है।
विराट कोहली जब मैदान पर उतरते हैं, तो उनके दिमाग में सिर्फ एक बात होती है सामने वाली टीम को हराना और इसके लिए खुद को झोंक देना। रवि शास्त्री ने इसी को 'अनमिट भूख' का नाम दिया है। उनके मुताबिक, विराट कभी अपनी पिछली कामयाबी से संतुष्ट नहीं होते। उनके लिए हर मैच पहला और आखिरी जैसा होता है।
युवा खिलाड़ियों के लिए सबक
आज के दौर में जहां आईपीएल और सोशल मीडिया के चलते स्टारडम जल्दी मिल जाता है, वहां खिलाड़ी अक्सर अपनी मेहनत की धार कम कर देते हैं। रवि शास्त्री कहते हैं कि युवाओं को कोहली से सीखना चाहिए कि फिटनेस और अनुशासन को 'सब कुछ' क्यों मानना ज़रूरी है। कोहली का वो 'प्रोफेशनलिज्म', जो उन्हें 15 साल से टॉप पर बनाए हुए है, सिर्फ जिम जाने से नहीं आया, बल्कि वो उस माइंडसेट का नतीजा है जहां समझौता करने की कोई गुंजाइश नहीं है।
शास्त्री का पैगाम साफ है
अगर आप रवि शास्त्री की बातों को गहराई से समझें, तो वे यह कह रहे हैं कि तकनीक सीखी जा सकती है, लेकिन वो 'एटीट्यूड' अपने अंदर से ही पैदा करना होता है। आप मैदान पर कितनी भी अच्छी फील्डिंग करें या बैटिंग, जब तक आप में विराट जैसी जीतने की ललक नहीं होगी, तब तक आप महानता की उस लिस्ट में शामिल नहीं हो पाएंगे।
कोहली ने अपने खेल से ये साबित किया है कि दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक भी उस इंसान के आगे फीकी पड़ जाती है जिसके पास अटूट अनुशासन और हर गेंद को खेलने का एक जुनून हो। यही वजह है कि आज भी दुनिया भर के कोच और पुराने खिलाड़ी कोहली की इस एक आदत को सबसे बड़ी मिसाल मानते हैं।