जब जसप्रीत बुमराह की गैरमौजूदगी पर पूछे गए सवाल पर भड़क गए हर्षित राणा

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News India Live, Digital Desk: क्रिकेट के मैदान पर जब कोई युवा खिलाड़ी कदम रखता है, तो उम्मीदों का बोझ बहुत भारी होता है। खासकर तब, जब आपको उस जगह खड़ा किया जाए जहाँ दुनिया का सबसे बेहतरीन गेंदबाज जसप्रीत बुमराह होना चाहिए था। कुछ ऐसा ही दबाव आजकल उभरते हुए तेज गेंदबाज हर्षित राणा पर महसूस किया जा रहा है।

हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक रिपोर्टर ने हर्षित से बुमराह की गैरमौजूदगी और उसके प्रभाव को लेकर सवाल पूछा, तो हर्षित अपना आपा थोड़ा खोते हुए दिखे। उनका दो टूक जवाब था "मुझे नहीं पता।"

आखिर क्यों चिढ़े हर्षित राणा?
अगर हम इंसानी नजरिए से देखें, तो हर्षित की झल्लाहट समझना मुश्किल नहीं है। जब भी कोई नया गेंदबाज टीम में आता है, रिपोर्टर्स और फैंस उसकी तुलना पुराने दिग्गजों से करने लगते हैं। हर सवाल घूम-फिर कर वहीं आ जाता है "बुमराह नहीं हैं, तो क्या आपको डर लग रहा है?" या "आप उनकी जगह कैसे भरेंगे?"

हर्षित राणा अपनी खुद की पहचान बनाना चाहते हैं। उन्होंने अब तक अपनी गेंदबाजी से यह साबित किया है कि उनमें गति और जोश की कोई कमी नहीं है। ऐसे में बार-बार बुमराह का नाम लेना उन्हें शायद ऐसा महसूस करा रहा था कि उनकी अपनी मेहनत को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है। उनका "मुझे नहीं पता" कहना सिर्फ एक जवाब नहीं, बल्कि एक फ्रस्ट्रेशन (भड़ास) भी हो सकता है।

बुमराह का साया और नई पीढ़ी की चुनौतियां
जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ी सदी में एक बार आते हैं। उनकी जगह कोई भी नहीं ले सकता, और यह बात हर नया गेंदबाज जानता है। लेकिन आज की सोशल मीडिया और मीडिया की दुनिया खिलाड़ियों को हर वक्त 'तुलना' की आग में झोंके रहती है। हर्षित राणा का यह अंदाज शायद उनकी अपनी गेंदबाजी पर ध्यान केंद्रित करने की एक कोशिश है।

एक उभरते हुए खिलाड़ी के लिए यह जरूरी है कि वह मैदान पर किसी का 'रिप्लेसमेंट' बनकर न खेले, बल्कि खुद अपनी स्किल्स पर भरोसा करे।

क्या यह एटीट्यूड सही है?
क्रिकेट जगत में कई लोगों को हर्षित का यह जवाब थोड़ा कड़ा लग सकता है, लेकिन मैदान पर तेज गेंदबाजों की पहचान ही उनकी आक्रामकता (Aggression) से होती है। हर्षित को 'बैड बॉय' इमेज में बांधना आसान है, लेकिन हमें यह भी समझना होगा कि मानसिक तौर पर एक युवा के लिए इतनी बड़ी जिम्मेदारी संभालना आसान नहीं है।