Indian Railways Bedroll Rules: क्या आप भी ट्रेन में मिली दोनों चादरें ऊपर ओढ़ लेते हैं? जानिए रेलवे का नियम और इनका सही इस्तेमाल

Indian Railways Bedroll Rules: क्या आप भी ट्रेन में मिली दोनों चादरें ऊपर ओढ़ लेते हैं? जानिए रेलवे का नियम और इनका सही इस्तेमाल

भारतीय रेलवे से यात्रा करते समय एसी कोच (First AC, 2nd AC और 3rd AC) में सफर करने वाले यात्रियों को रेलवे की ओर से एक सीलबंद पैकेट में बेडरोल किट (Bedroll Kit) दिया जाता है। इस किट में आमतौर पर एक तकिया, तकिए का कवर, एक ऊनी कंबल, एक फेस टॉवल और दो सफेद चादरें (Bed Sheets) शामिल होती हैं। अक्सर देखा जाता है कि ज्यादातर यात्री बिना सोचे-समझे दोनों सफेद चादरों को एक साथ मिलाकर अपने ऊपर ओढ़ लेते हैं या फिर ठंड से बचने के लिए कंबल के नीचे दोनों चादरें लपेट लेते हैं। हालांकि, रेलवे के नियमों और हाइजीन प्रोटोकॉल के मुताबिक इन दोनों चादरों को देने का एक बेहद खास और तकनीकी उद्देश्य होता है, जिसके बारे में 90 प्रतिशत यात्रियों को सही जानकारी नहीं होती।

ट्रेन में दो सफेद चादरें मिलने के पीछे का असली वैज्ञानिक और हाइजीन कारण

भारतीय रेल के एसी डिब्बों में रोजाना लाखों यात्री सफर करते हैं। ट्रेन की बर्थ पर बिछाया जाने वाला रेक्सिन का गद्दा (Berth Mattress) और रेलवे द्वारा दिया जाने वाला भारी ऊनी कंबल (Blanket) ऐसे आइटम हैं जिन्हें हर यात्रा के बाद धोना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता। रेलवे के नियमों के अनुसार चादरें और तकिए के कवर हर ट्रिप के बाद उच्च तापमान पर धुले और सैनिटाइज किए जाते हैं, जबकि कंबल को महीने में एक या दो बार ही ड्राई क्लीन किया जाता है। ऐसे में यात्री की त्वचा और शरीर को गद्दे व कंबल में मौजूद धूल, बैक्टीरिया और एलर्जी से बचाने के लिए दो अलग-अलग चादरों का सुरक्षात्मक आवरण तैयार किया जाता है।

जानिए दोनों चादरों का सही तरीके से इस्तेमाल करने का नियम

रेलवे के दिशा-निर्देशों के अनुसार दोनों चादरों का उपयोग दो अलग-अलग स्तरों पर किया जाना चाहिए।

  • पहली चादर (Bottom Sheet): बेडरोल खोलते ही सबसे पहले एक सफेद चादर को पूरी तरह खोलकर ट्रेन की बर्थ (गद्दे) के ऊपर बिछाना चाहिए। यह चादर आपके शरीर और गद्दे के बीच एक सुरक्षा कवच बनाती है ताकि गद्दे पर मौजूद धूल और कीटाणु आपके सीधे संपर्क में न आएं।

  • दूसरी चादर (Top Sheet): दूसरी सफेद चादर को अपने ऊपर ओढ़ने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद ऊनी कंबल को इस दूसरी चादर के ऊपर डाला जाता है। इस प्रकार दूसरी चादर आपके शरीर और ऊनी कंबल के बीच एक बैरियर का काम करती है, जिससे कंबल का खुरदरा रेशा या धूल आपकी त्वचा और चेहरे को नहीं छूती।

गलत इस्तेमाल से हो सकती हैं त्वचा संबंधी समस्याएं

यदि आप दोनों चादरें ऊपर ओढ़ लेते हैं और गद्दे पर बिना चादर बिछाए सीधे लेटते हैं, तो गद्दे पर पहले से बैठे यात्रियों के पसीने और बैक्टीरिया के सीधे संपर्क में आने का खतरा बढ़ जाता है। वहीं यदि आप बिना चादर लगाए सीधे कंबल ओढ़ लेते हैं, तो कंबल के रोएं और धूल कण सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर एलर्जी, छींक या त्वचा पर खुजली व रैशेज की समस्या पैदा कर सकते हैं। दोनों चादरों को सैंडविच की तरह ऊपर और नीचे इस्तेमाल करने से यात्रा पूरी तरह स्वच्छ और सुरक्षित बनी रहती है।

सफेद रंग की चादरें ही क्यों देता है भारतीय रेलवे?

रेलवे द्वारा हमेशा सफेद रंग के लिनेन और चादरों का उपयोग करने के पीछे भी एक ठोस कारण है। सफेद कपड़े पर किसी भी प्रकार का दाग, गंदगी या कीड़ा तुरंत नजर आ जाता है, जिससे सफाई कर्मचारियों को गंदे कपड़ों की पहचान करने में आसानी होती है। इसके अलावा सफेद चादरों को ब्लीच और गर्म पानी में अत्यधिक तापमान पर धोया जाता है ताकि सभी प्रकार के कीटाणु खत्म हो सकें। रंगीन कपड़े बार-बार धोने पर फेड हो जाते हैं, जबकि सफेद चादरें हाइजीन और शुद्धता का भरोसा देती हैं।

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