Vice President Polls : अपनों ने ही दिया धोखा? उपराष्ट्रपति चुनाव के एक झटके ने हिला दी INDIA गठबंधन की नींव
News India Live, Digital Desk: राजनीति में अक्सर कहा जाता है कि सबसे बड़ा डर बाहरी दुश्मनों से नहीं, बल्कि भीतरी घात से होता है. कुछ ऐसा ही हाल इन दिनों विपक्षी गठबंधन 'INDIA' का है. उपराष्ट्रपति चुनाव के नतीजों ने गठबंधन के अंदर एक ऐसी आग सुलगा दी है, जो अब धुआं बनकर सबके सामने आ रही है. चुनाव में हुई क्रॉस-वोटिंग ने विपक्षी एकता के दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है और गठबंधन को एक ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां से आगे का रास्ता धुंधला नज़र आ रहा है.
हुआ क्या था उपराष्ट्रपति चुनाव में?
उपराष्ट्रपति चुनाव में NDA के उम्मीदवार सी.पी. राधाकृष्णन को उम्मीद से ज़्यादा वोट मिले, जबकि 'INDIA' गठबंधन के उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी को उतने वोट भी नहीं मिल पाए, जितने गठबंधन के सांसदों की संख्या है.आंकड़ों के गणित में गठबंधन के करीब 15 वोट या तो NDA के खाते में चले गए या फिर अवैध हो गए इसी को लेकर अब बवाल मचा है. बीजेपी कह रही है कि विपक्ष के कई सांसदों ने 'अंतरात्मा की आवाज़' सुनकर उनके उम्मीदवार को वोट दिया, तो वहीं विपक्षी खेमे में खलबली मची हुई है.
एक-दूसरे पर उठ रही हैं उंगलियां
इस घटना के बाद से ही 'INDIA' गठबंधन के अंदर का माहौल गर्म है. कोई इसे वोट की चोरी बता रहा है तो कोई कह रहा है कि वोटों को खरीदा गया है.कांग्रेस के कुछ नेता जहां इस मामले की गंभीर जांच की मांग कर रहे हैं, वहीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) जैसी पार्टियां दबी ज़ुबान में दूसरी सहयोगी पार्टियों पर शक जता रही हैं
यह पहला मौका नहीं है जब गठबंधन के भीतर दरारें दिखी हों, लेकिन इस बार का मामला सीधे-सीधे भरोसे पर चोट करने जैसा है. जब आप एक साथ मिलकर किसी उम्मीदवार को उतारते हैं और आपके ही लोग उसे वोट नहीं देते, तो यह गठबंधन की एकजुटता पर सबसे बड़ा प्रहार होता है.
क्या भविष्य है इस गठबंधन का?
उपराष्ट्रपति चुनाव के इस एक नतीजे ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि क्या यह गठबंधन वाकई एकजुट है? जब एक गुप्त मतदान में विधायक और सांसद अपने गठबंधन के प्रति वफादार नहीं रह सकते, तो आने वाले विधानसभा चुनावों और फिर लोकसभा चुनाव में एकजुटता की क्या गारंटी है?
नेताओं के बीच आपसी तालमेल की कमी और अविश्वास की खाई अब और गहरी होती दिख रही है. कई घटक दल पहले से ही कांग्रेस के नेतृत्व और फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं. अब इस क्रॉस-वोटिंग ने उन शंकाओं को और भी बढ़ा दिया है. यह घटना सिर्फ एक चुनावी हार नहीं है, बल्कि यह गठबंधन के अंदर पनप रहे अविश्वास और बिखराव का एक बड़ा संकेत है. अब देखना यह होगा कि 'INDIA' गठबंधन इस झटके से कैसे उबरता है और भविष्य में अपनी एकजुटता को कैसे बनाए रखता है.