Vice President Election 2025 : सबको चौंका देगा ये उपराष्ट्रपति चुनाव? जानिए क्यों खास है राधाकृष्णन और रेड्डी की टक्कर
News India Live, Digital Desk: Vice President Election 2025 : देश में एक बार फिर चुनावी माहौल गरमा गया है, लेकिन इस बार मौका लोकसभा या विधानसभा का नहीं, बल्कि देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद, यानी उपराष्ट्रपति के चुनाव का है। स्वास्थ्य कारणों से पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद, यह चुनाव समय से पहले हो रहा है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि रायसीना हिल्स में उपराष्ट्रपति के तौर पर कौन अपनी जगह बनाएगा।
आमने-सामने दो दिग्गज: एक राजनेता तो दूसरे कानून के ज्ञाता
इस चुनावी मैदान में दो मुख्य चेहरे आमने-सामने हैं। सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने महाराष्ट्र के राज्यपाल और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सीपी राधाकृष्णन को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, विपक्षी दलों के 'इंडिया' गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बी. सुदर्शन रेड्डी को मैदान में उतारा है। सीपी राधाकृष्णन तमिलनाडु से आते हैं और उनकी गिनती एक अनुभवी राजनेता के तौर पर होती है, जबकि तेलंगाना के रहने वाले बी. सुदर्शन रेड्डी कानून और संविधान की गहरी समझ रखते हैं।
कैसे होता है उपराष्ट्रपति का चुनाव?
उपराष्ट्रपति का चुनाव राष्ट्रपति चुनाव से थोड़ा अलग होता है। इसमें आम जनता सीधे वोट नहीं डालती, बल्कि जनता के चुने हुए प्रतिनिधि यानी सांसद वोट डालते हैं। इस चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्य, जिनमें मनोनीत सदस्य भी शामिल हैं, मतदान करते हैं। हालांकि, इसमें राज्यों के विधायक हिस्सा नहीं लेते हैं।] वोटिंग एक खास प्रक्रिया के तहत होती है, जिसे 'एकल संक्रमणीय मत' प्रणाली कहा जाता है और यह गुप्त मतदान के जरिए पूरी होती है।
क्या कहते हैं आंकड़े?
किसी भी चुनाव में सबसे अहम होते हैं आंकड़े, और यहां भी पलड़ा सत्ताधारी गठबंधन का भारी नजर आ रहा है। उपराष्ट्रपति चुनाव में जीत के लिए आधे से ज्यादा सांसदों के वोट की जरूरत होती है। मौजूदा समय में दोनों सदनों को मिलाकर सांसदों की कुल संख्या 788 है, लेकिन कुछ सीटों के खाली होने की वजह से यह आंकड़ा फिलहाल 781 है। ऐसे में, जीत के लिए 391 वोटों की जरूरत होगी। संख्या बल के हिसाब से देखें तो एनडीए के पास जरूरी आंकड़े से कहीं ज्यादा सांसद हैं, जिससे उनके उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय मानी जा रही है।[
यह चुनाव सिर्फ एक संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आने वाले समय की राजनीति की भी एक झलक पेश करेगा। मंगलवार, 9 सितंबर को संसद भवन में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मतदान होगा और उसी दिन देर शाम तक वोटों की गिनती के बाद नतीजों का ऐलान कर दिया जाएगा