यूपी की जेलों में घटी ओवरक्राउडिंग: योगी सरकार के 9.5 वर्षों में 1.77 से घटकर 1.03 हुई दर, 6 नई हाईटेक जेलें जल्द
उत्तर प्रदेश के कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं को आधुनिक, सुरक्षित और मानवीय रूप देने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार को बड़ी सफलता हाथ लगी है। दशकों से उत्तर प्रदेश की जेल व्यवस्था के समक्ष सबसे बड़ी चुनौती बैरकों में क्षमता से अधिक कैदियों का जमावड़ा यानी ओवरक्राउडिंग रही है। जेलों में जरूरत से ज्यादा भीड़ न केवल आंतरिक सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी में बाधा उत्पन्न करती थी, बल्कि बंदियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता, मानवाधिकारों और पुनर्वास कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती थी। इस दीर्घकालिक समस्या के स्थाई समाधान के लिए राज्य सरकार ने पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान बुनियादी ढांचे के विस्तार और आधुनिक जेल परिसरों के निर्माण की एक व्यापक कार्ययोजना पर काम किया। परिणामस्वरूप प्रदेश की जेलों में ओवरक्राउडिंग की दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है, जिससे राज्य की सुधारात्मक व्यवस्था एक नए और सुदृढ़ मॉडल के रूप में उभरकर सामने आई है।
साढ़े 9 वर्षों में ऐतिहासिक सुधार: ओवरक्राउडिंग दर 1.77 से घटकर 1.03 पर सिमटी
सांख्यिकीय विश्लेषण और कारागार विभाग के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2017 में जब प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था का पुनर्गठन शुरू हुआ, उस समय उत्तर प्रदेश की 70 जेलों की कुल स्वीकृत बंदी क्षमता मात्र 58,400 थी, जबकि वास्तविक कैदियों की संख्या कहीं अधिक होने के कारण ओवरक्राउडिंग अनुपात 1.77 के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया था। इसका सीधा मतलब यह था कि जेलों में उनकी निर्धारित क्षमता से लगभग पौने दो गुना अधिक कैदियों को रखने की विवशता बनी हुई थी। विगत साढ़े नौ वर्षों में निरंतर बजटीय आवंटन, व्यवस्थित निर्माण कार्यों और प्रशासनिक पुनर्संरचना के दम पर वर्ष 2026 तक प्रदेश की कुल जेल क्षमता बढ़कर 77,673 बंदियों तक पहुंच गई है। क्षमता में दर्ज की गई इस भारी वृद्धि का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में ओवरक्राउडिंग दर घटकर 1.03 के स्तर पर आ चुकी है, जो लगभग सामान्य और संतुलित क्षमता के बेहद करीब है।
वर्तमान में 77 कारागारों का मजबूत नेटवर्क: 7 नई जेलों से मिली 10,495 की अतिरिक्त क्षमता
मौजूदा समय में उत्तर प्रदेश के भीतर कुल 77 कारागारों का एक सुदृढ़ और व्यापक नेटवर्क सक्रिय रूप से संचालित हो रहा है। इस संगठनात्मक ढांचे में 7 केंद्रीय कारागार, 2 विशेष महिला केंद्रीय कारागार, 64 जिला कारागार, 1 विशेष कारागार, 2 उप कारागार तथा किशोर बंदियों के सुधार हेतु 1 आदर्श किशोर सदन शामिल हैं। योगी सरकार ने वर्ष 2017 के बाद से अब तक सात बिल्कुल नई और आधुनिक जेलों का विधिवत संचालन शुरू कराया है। इनमें चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा केंद्रीय कारागार, प्रयागराज, श्रावस्ती तथा पुरानी जिला कारागार बरेली का आधुनिक पुनरुद्धार शामिल है। इन सात नई जेलों के शुरू होने से अकेले 10,495 बंदियों की नई और अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई, जिसने आसपास के तमाम घनी आबादी वाले जनपदों की पुरानी जेलों पर से कैदियों का भारी दबाव पूरी तरह समाप्त कर दिया और वहां की सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व मजबूती दी।
7,732 कैदियों के लिए 6 नई जिला जेलों की योजना: कानपुर और मुरादाबाद में बनेंगे बड़े परिसर
राज्य में भविष्य की जनसंख्या वृद्धि और न्यायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए योगी सरकार अब छह और नई आधुनिक जिला जेलों के निर्माण की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इन प्रस्तावित छह जिला जेलों के पूर्ण होने से उत्तर प्रदेश की कुल जेल प्रणाली में 7,732 अतिरिक्त बंदियों के सुरक्षित और सुव्यवस्थित आवासन की क्षमता विकसित होगी। इस नई कार्ययोजना के तहत कानपुर नगर में 2,030 बंदियों की विशाल क्षमता वाली नई आधुनिक जेल, मुरादाबाद में 2,000 क्षमता, शाहजहांपुर में 1,520 क्षमता, औरैया में 1,056 क्षमता, ज्ञानपुर-भदोही में 574 क्षमता तथा ललितपुर में 552 बंदियों की क्षमता वाली नई जिला जेल का निर्माण प्रस्तावित किया गया है। कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाओं द्वारा इन सभी छह जेल परियोजनाओं की प्रशासनिक, तकनीकी एवं वित्तीय स्वीकृतियों का विस्तृत प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, जिस पर शीघ्र ही कैबिनेट स्तर से अंतिम स्वीकृति की मुहर लगने वाली है।
अमेठी और महोबा जेल का काम 90% से अधिक पूरा: 6 निर्माणाधीन जेलें वर्ष 2026 तक होंगी तैयार
शासन की प्राथमिकता केवल नई जेलों के प्रस्ताव तैयार करने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वर्तमान में निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं को युद्धस्तर पर पूरा कराया जा रहा है। बुंदेलखंड और अवध क्षेत्र के तहत अमेठी और महोबा में बन रही नई जिला जेलों का सिविल और इलेक्ट्रिकल निर्माण कार्य अब अपने अंतिम चरण में प्रवेश कर चुका है। नवीनतम प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, अमेठी जिला जेल का निर्माण कार्य 98 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है, जबकि महोबा जेल का कार्य 93 प्रतिशत से अधिक संपन्न कर लिया गया है। इन दोनों परियोजनाओं के अतिरिक्त हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ जनपदों में भी अत्याधुनिक सुरक्षा मानकों वाली नई जेलों का निर्माण तेजी से जारी है। इन छह निर्माणाधीन जेल परियोजनाओं की कुल स्वीकृत क्षमता 6,156 बंदियों की होगी। राज्य सरकार ने निर्माण एजेंसियों को सख्त समय-सीमा तय करते हुए निर्देश दिया है कि इनमें से अधिकांश परियोजनाएं वर्ष 2026 के भीतर पूरी तरह पूर्ण कर कारागार विभाग को हस्तगत करा दी जाएं।
संभल, शामली और बलिया समेत 6 जिलों में भूमि अधिग्रहण तेज: मानवीय सुधारों पर विशेष बल
जेल अवसंरचना के समग्र विस्तार के क्रम में योगी सरकार उन सीमावर्ती और नवगठित जनपदों में भी नई जेलों की स्थापना की ठोस तैयारी कर रही है, जहां अब तक स्वतंत्र जिला कारागार उपलब्ध नहीं थे। इस योजना के अंतर्गत संभल, शामली, बलिया, सहारनपुर, अमरोहा और चंदौली जनपदों में नई जेलों की स्थापना हेतु भूमि क्रय, भू-अधिग्रहण और आधिकारिक रजिस्ट्री की विधिक प्रक्रिया पूरी गति से आगे बढ़ाई जा रही है। इनमें से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए शासन स्तर पर प्रारंभिक भूमि अधिग्रहण हेतु करोड़ों रुपये की विशेष बजट धनराशि पहले ही जारी की जा चुकी है। कारागार विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि जेलों में अत्यधिक भीड़ कैदियों के बुनियादी मानवाधिकारों, स्वास्थ्य सेवाओं, पेयजल, स्वच्छता और पुनर्वास कार्यक्रमों को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाती है। इसी मानवीय और सुरक्षात्मक चुनौती का स्थायी समाधान निकालने के लिए योगी सरकार ने जेलों की क्षमता वृद्धि, नई बैरकों के निर्माण, पुराने परिसरों के आधुनिकीकरण, हाई-टेक सीसीटीवी निगरानी और आधुनिक सुरक्षा संसाधनों को शीर्ष प्राथमिकता दी है, ताकि प्रत्येक बंदी को जेल मैनुअल के निर्धारित मानकों के अनुरूप आवासीय वातावरण मिल सके और जेलें वास्तव में सच्चे सुधार गृह बन सकें।