कानपुर इंटरसिटी और चित्रकूट एक्सप्रेस यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी, रेलवे ने कोच बढ़ाकर 12 से किए 24
उत्तर प्रदेश और देश के सबसे व्यस्त रेल मार्गों पर रोजाना सफर करने वाले लाखों दैनिक यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों और व्यापारियों के लिए भारतीय रेलवे ने एक बहुत ही शानदार और राहत भरी खबर का ऐलान किया है। अक्सर ट्रेन के जनरल डिब्बों में पैर रखने तक की जगह न मिलने, भारी भीड़ के कारण धक्के खाने और सीट के लिए होने वाली मारामारी से परेशान रहने वाले यात्रियों की समस्याओं को गंभीरता से समझते हुए रेलवे प्रशासन ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। रेलवे बोर्ड और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त पहल के तहत उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों को आपस में जोड़ने वाली अत्यंत महत्वपूर्ण ट्रेनों—कानपुर इंटरसिटी और चित्रकूट एक्सप्रेस—में कोचों की संख्या को सीधे दोगुना कर दिया गया है। अब ये लोकप्रिय ट्रेनें पुराने 12 कोचों के बजाय पूरे 24 आधुनिक आईसीएफ (ICF) कोचों के साथ पटरी पर दौड़ती हुई नजर आएंगी, जिसमें साधारण श्रेणी और एसएलआर (SLR) कोचों का विशेष विस्तार किया गया है। रेलवे के इस दूरदर्शी फैसले से न केवल यात्रियों को भीड़भाड़ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि रोजाना सफर करने वाले हजारों आम आदमियों का सफर पहले की तुलना में बेहद सुगम, सुरक्षित और आरामदायक भी बन जाएगा।
दैनिक यात्रियों की लंबे समय से चली आ रही मांग हुई पूरी, ट्रेनों में अब लगेंगे 24 आईसीएफ कोच
भारतीय रेलवे के उत्तर मध्य रेलवे और उत्तर रेलवे जोन के अंतर्गत चलने वाली इन प्रमुख ट्रेनों में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों की संख्या क्षमता से कहीं अधिक होती थी। खासकर सुबह और शाम के व्यस्त समय (Peak Hours) में कानपुर सेंट्रल, प्रयागराज संगम, चित्रकूट धाम कर्वी और प्रतापगढ़ के बीच आवागमन करने वाले यात्रियों को हमेशा यह शिकायत रहती थी कि ट्रेनों में कोच कम होने के कारण उन्हें भीषण भीड़ का सामना करना पड़ता है। कई बार स्थिति इतनी विकट हो जाती थी कि यात्रियों को डिब्बों के दरवाजों पर लटककर यात्रा करनी पड़ती थी, जिससे हर वक्त किसी बड़ी दुर्घटना का अंदेशा बना रहता था। यात्रियों की इस गंभीर समस्या और लगातार बढ़ रही मांग को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने अंततः बड़ा फेरबदल करते हुए ट्रेनों की वह क्षमता बढ़ाने का निर्णय लिया जो यात्रियों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी थी। अब इन ट्रेनों में कुल 24 आईसीएफ कोच जोड़े जा रहे हैं, जिनमें 22 साधारण श्रेणी (जनरल कोच) और दो एसएलआर/डी (SLR/D) कोच शामिल होंगे। जनरल डिब्बों की संख्या में अचानक हुई इस भारी बढ़ोतरी का सबसे बड़ा और सीधा फायदा उन दैनिक यात्रियों को मिलेगा जो बिना रिजर्वेशन के सामान्य टिकट पर सफर करते हैं।
कानपुर-प्रयागराज संगम इंटरसिटी एक्सप्रेस में तत्काल प्रभाव से लागू हुई नई व्यवस्था
इस विस्तारित व्यवस्था के तहत रेलवे ने सबसे पहले अत्यधिक व्यस्त रहने वाले मार्ग पर चलने वाली गाड़ी संख्या 14102 और 14101—यानी कानपुर सेंट्रल से प्रयागराज संगम के बीच संचालित होने वाली लोकप्रिय इंटरसिटी एक्सप्रेस—में इस नियम को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया है। अब यह ट्रेन अपने निर्धारित समय पर 24 कोचों के साथ पटरियों पर दौड़ रही है, जिससे इस रूट पर सफर करने वाले यात्रियों को तुरंत राहत मिलनी शुरू हो गई है। कानपुर और प्रयागराज के बीच शिक्षा, व्यापार और नौकरी के सिलसिले में रोजाना हजारों लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में इंटरसिटी एक्सप्रेस में कोचों की संख्या 12 से बढ़ाकर 24 किए जाने से ट्रेन के भीतर पैसेंजर होल्डिंग कैपेसिटी लगभग दोगुनी हो गई है। यात्रियों ने रेलवे के इस कदम की भूरी-भरी प्रशंसा करते हुए कहा है कि अब उन्हें ट्रेन पकड़ने के लिए घंटों पहले प्लेटफॉर्म पर आकर धक्का-मुक्की नहीं करनी पड़ेगी और सभी को आसानी से बैठने के लिए पर्याप्त सीट मिल सकेगी।
चित्रकूट एक्सप्रेस और मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ एक्सप्रेस भी बढ़ी हुई क्षमता के साथ शुरू
कानपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस के अलावा उत्तर प्रदेश के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के केंद्रों को जोड़ने वाली अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी इस नई व्यवस्था का विस्तार कर दिया गया है। रेलवे अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक सूचना के अनुसार, गाड़ी संख्या 22442 (कानपुर सेंट्रल से चित्रकूट धाम कर्वी एक्सप्रेस) और गाड़ी संख्या 14124 (चित्रकूट धाम कर्वी से मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ एक्सप्रेस) ने आठ सितंबर से अपने निर्धारित रूट पर बढ़े हुए यानी 24 कोचों के साथ संचालन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही, वापसी की दिशा में चलने वाली ट्रेनें—यानी गाड़ी संख्या 14123 (मां बेल्हा देवी धाम प्रतापगढ़ से चित्रकूट धाम कर्वी एक्सप्रेस) और गाड़ी संख्या 22441 (चित्रकूट धाम कर्वी से कानपुर सेंट्रल एक्सप्रेस)—नौ सितंबर से पूरी तरह से 24 कोचों के साथ पटरी पर उतर चुकी हैं। इस प्रकार इन सभी रूटों पर यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए अब ट्रेन में सीट पाने की मारामारी इतिहास की बात बनने जा रही है, और रेलवे का यह कदम क्षेत्रीय परिवहन व्यवस्था को एक नए स्तर पर ले जाने का काम कर रहा है।
भीड़भाड़ से मिलेगी मुक्ति, यात्रियों का सफर होगा पहले से अधिक सुरक्षित और सुगम
भारतीय रेलवे का यह कदम केवल ट्रेनों में डिब्बों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह यात्रियों की सुरक्षा और उनके मानवीय अधिकारों से भी जुड़ा हुआ एक बहुत बड़ा सुधार है। जब ट्रेनों में सामान्य कोचों की संख्या कम होती है, तो अत्यधिक भीड़ के कारण चेन पुलिंग (Alarm Chain Pulling) की घटनाएं बहुत आम हो जाती हैं, क्योंकि लोग किसी तरह जबरन ट्रेन के अंदर घुसने की कोशिश करते हैं। इससे ट्रेनों का समय तो खराब होता ही है, साथ ही रेलवे के संचालन पर भी अनावश्यक दबाव पड़ता है। अब जब कानपुर इंटरसिटी और चित्रकूट एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में जनरल कोचों की संख्या दोगुनी कर दी गई है, तो यात्रियों को ट्रेन में प्रवेश करने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ेगा। पर्याप्त मात्रा में सीटें उपलब्ध होने से प्लेटफॉर्म पर होने वाली भगदड़ और आपाधापी पर भी स्वतः रोक लगेगी। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह यात्रा अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित और तनावमुक्त हो जाएगी।
रेलवे प्रशासन की यह पहल क्षेत्रीय विकास और यात्रियों के कल्याण में साबित होगी मील का पत्थर
यातायात विशेषज्ञों और रेलवे यूनियनों ने भी प्रशासन के इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे एक बेहद सराहनीय कदम बताया है। उनका मानना है कि वर्तमान समय में जब सड़क मार्ग पर यातायात का दबाव और प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित रेल यात्रा की ओर आकर्षित करना बेहद जरूरी है। जब ट्रेनें समय पर चलेंगी और उनमें यात्रियों को बैठने के लिए पर्याप्त जगह और सुविधाएं मिलेंगी, तो आम जनता का सार्वजनिक परिवहन पर भरोसा और अधिक मजबूत होगा। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी यात्रियों की बढ़ती संख्या और उनकी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए देश के अन्य व्यस्त मार्गों पर भी इसी प्रकार कोचों के विस्तार की योजना पर काम किया जा रहा है। कानपुर, प्रयागराज, चित्रकूट और प्रतापगढ़ के बीच यात्रा करने वाले तमाम रेल यात्रियों ने रेलवे मंत्रालय और स्थानीय रेलवे प्रशासन के प्रति अपना आभार व्यक्त किया है, जिनकी बदौलत उनका रोजाना का सफर अब आसान और खुशगवार बन गया है।