Uttar Pradesh : शोधगंगा पोर्टल पर दक्षिणी भारत का वर्चस्व, यूपी के गिने चुने विश्वविद्यालय ही शीर्ष में
- by Archana
- 2025-08-18 14:48:00
News India Live, Digital Desk: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का "शोधगंगा" पोर्टल, जो शोध पत्रों और पीएचडी शोध प्रबंधों का एक विस्तृत डिजिटल भंडार है, विभिन्न भारतीय विश्वविद्यालयों के शोध रुझानों को प्रदर्शित कर रहा है. हालांकि, पोर्टल पर शोध कार्यों को जमा करने में दक्षिणी राज्यों के विश्वविद्यालयों का स्पष्ट दबदबा दिखाई दे रहा है. उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य, जिसके पास देश में सबसे अधिक राज्य विश्वविद्यालय (28 से अधिक) और 60 से अधिक निजी विश्वविद्यालय हैं, से केवल तीन ही विश्वविद्यालय शीर्ष दस की सूची में जगह बना पाए हैं.
"शोधगंगा" पोर्टल देशभर के 550 से अधिक विश्वविद्यालयों से 4 लाख 35 हजार से अधिक शोध प्रबंधों और शोध पत्रों का विशाल संग्रह प्रस्तुत करता है. इस पहल का उद्देश्य शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और छात्रों के लिए उच्च शिक्षा में किए गए शोध कार्यों को आसानी से उपलब्ध कराना है, जिससे ज्ञान का प्रसार हो सके और डुप्लीकेसी से बचा जा सके.
आंकड़ों के अनुसार, शोध जमा करने में कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों के विश्वविद्यालय अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं. दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश से केवल अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू), छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) कानपुर और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ही राष्ट्रीय स्तर पर शीर्ष दस में अपनी जगह बना पाए हैं.
एएमयू शोधगंगा पोर्टल पर 13,000 से अधिक शोध प्रबंधों के साथ पांचवें स्थान पर है. सीएसजेएमयू कानपुर 9,000 से अधिक शोध कार्यों के साथ आठवें पायदान पर है, जबकि बीएचयू 8,000 से अधिक शोध प्रबंधों के साथ दसवें स्थान पर है. हालांकि ये तीनों विश्वविद्यालय उल्लेखनीय प्रदर्शन कर रहे हैं, उत्तर प्रदेश के लिए चिंता का विषय यह है कि राज्य के अन्य बड़े और महत्वपूर्ण विश्वविद्यालयों का प्रदर्शन उत्साहजनक नहीं है. राज्य के शीर्ष 50 विश्वविद्यालयों की सूची में भी उत्तर प्रदेश से केवल 4-5 ही शामिल हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के कई विश्वविद्यालयों में शोध गंगा पोर्टल को लेकर जागरूकता की कमी या तकनीकी समस्याओं के कारण शोध कार्यों को समय पर अपलोड नहीं किया जा रहा है. यह स्थिति दर्शाती है कि राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों को अपनी शोध उत्पादकता और उनके डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है ताकि वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी उपस्थिति को मजबूत कर सकें और शोध के क्षेत्र में दक्षिणी राज्यों की बराबरी कर सकें.
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