US-Iran War: अमेरिका ने ईरान पर क्यों किया हमला? क्या सऊदी अरब ने किया ट्रम्प को राजी
News India Live, Digital Desk : ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की मौत के बाद पूरी दुनिया स्तब्ध है। लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि आखिर अमेरिका ने इस वक्त ही ईरान पर इतना बड़ा हमला क्यों किया? क्या यह केवल अमेरिकी खुफिया विभाग की रिपोर्ट का नतीजा था या इसके पीछे अरब देशों की कोई बड़ी लॉबिंग (Lobbying) काम कर रही थी? इस हमले के पीछे के चौंकाने वाले कारण सामने आए हैं।
सऊदी अरब की भूमिका: क्या 'दोस्त' ने बनाया दबाव?
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हमले के पीछे केवल इजरायल ही नहीं, बल्कि सऊदी अरब (Saudi Arabia) की भी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि सऊदी अरब ने व्हाइट हाउस में एक मजबूत लॉबिंग की थी। सऊदी रक्षा मंत्री ने कथित तौर पर चेतावनी दी थी कि यदि अमेरिका पीछे हटता है, तो ईरान इस क्षेत्र में और भी अधिक शक्तिशाली और खतरनाक हो जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देशों की सुरक्षा और ईरान के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए सऊदी अरब ने अमेरिका को इस कदम के लिए प्रेरित किया।
इंटेलिजेंस रिपोर्ट: "कोई जोखिम नहीं" का दावा
अमेरिकी खुफिया विभाग (Intelligence) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक विशेष ब्रीफिंग दी थी। इसमें दावा किया गया था कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी मिसाइल क्षमताएं अब अमेरिका के लिए एक 'इमिनेंट थ्रेट' (तत्काल खतरा) बन चुकी हैं। खुफिया रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया था कि खामेनेई को ट्रैक करना अब आसान है और इस ऑपरेशन में अमेरिकी सैन्य हताहतों का जोखिम बहुत कम है। इसी "लो रिस्क-हाई रिवॉर्ड" (कम जोखिम-बड़ा फायदा) वाली रिपोर्ट ने ट्रम्प को हमले की हरी झंडी देने के लिए राजी किया।
डोनाल्ड ट्रम्प का रुख: "ईरान के पास अब सबसे बड़ा मौका"
हमले की पुष्टि करते हुए राष्ट्रपति ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि खामेनेई की मौत न केवल अमेरिका के लिए न्याय है, बल्कि ईरानी जनता के लिए अपना देश वापस पाने का सबसे बड़ा अवसर है। ट्रम्प ने स्पष्ट किया कि "भारी और सटीक बमबारी" (Heavy and Pinpoint Bombing) तब तक जारी रहेगी जब तक मिडिल ईस्ट में अमेरिका के लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लिया जाता।
क्षेत्रीय स्थिरता और भविष्य का संकट
ईरान ने इस हमले को 'महान अपराध' करार देते हुए 40 दिनों के शोक की घोषणा की है। साथ ही, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने 'ऑपरेशन ट्रुथफुल प्रॉमिस 4' के तहत इजरायल और खाड़ी में अमेरिकी ठिकानों पर पलटवार शुरू कर दिया है। सऊदी अरब और यूएई ने अपनी हवाई सुरक्षा (Air Defense) को हाई अलर्ट पर रखा है। इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की कीमतों को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।