US-Iran War: ट्रंप का महा-ऐलान, 'ईरान का खेल खत्म, नेवी-एयरफोर्स तबाह'; जल्द रुक सकता है विनाशकारी युद्ध!
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खौफनाक जंग अब अपने अंतिम चरण में पहुंचती नजर आ रही है। गुरुवार, 2 अप्रैल को व्हाइट हाउस से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए एक बड़ी खुशखबरी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि इस युद्ध में वाशिंगटन के मुख्य रणनीतिक लक्ष्य अब लगभग पूरे हो चुके हैं और बहुत जल्द इस महायुद्ध पर पूर्ण विराम लग सकता है।
'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' से ईरान पस्त
राष्ट्रपति ट्रंप ने हुंकार भरते हुए कहा कि महज एक महीने पहले शुरू किए गए 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' ने दुनिया के नंबर एक आतंकवाद-प्रायोजक देश ईरान की सैन्य ताकत की रीढ़ तोड़ दी है। उन्होंने दुनिया को जानकारी दी कि आज ईरान की नौसेना और वायुसेना पूरी तरह से तबाह हो चुकी है। इसके अलावा, आतंकी शासन चलाने वाले ईरान के शीर्ष नेता मारे जा चुके हैं और 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) का कमांड व कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह से मटियामेट हो चुका है। ट्रंप ने इसे युद्ध के मैदान में एक तेज और जबरदस्त जीत करार दिया है।
कबाड़ में तब्दील हुईं ड्रोन और मिसाइल फैक्टरियां
अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की मिसाइल और घातक ड्रोन बनाने की क्षमता को इस कदर कुचला गया है कि अब वह ना के बराबर रह गई है। रॉकेट लॉन्चर और हथियारों के कारखानों के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए हैं। ट्रंप ने इसे सैन्य इतिहास की सबसे तेज और विनाशकारी कार्रवाई बताते हुए कहा कि आज तक किसी भी दुश्मन देश ने सिर्फ चार हफ्तों के भीतर इतने बड़े पैमाने पर तबाही का सामना नहीं किया होगा। अमेरिकी सेना अपने दुश्मनों पर लगातार भारी पड़ रही है।
पूरी हुई 2015 की कसम और आतंकी क्रूरता का अंत
डोनाल्ड ट्रंप ने 2015 के अपने चुनाव अभियान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने उसी दिन यह कसम खाई थी कि वह ईरान को कभी भी परमाणु बम हासिल नहीं करने देंगे। उन्होंने ईरान के शासकों पर 47 सालों से 'अमेरिका और इजरायल के विनाश' की साजिश रचने का कड़ा आरोप लगाया। ट्रंप ने बेरूत में 241 मरीन सैनिकों की हत्या, USS Cole पर हुए आतंकी हमले और हाल ही में 7 अक्टूबर को इजरायल में हुई बर्बरता के लिए सीधे तौर पर ईरानी गुर्गों को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप के मुताबिक, दुनिया की हिफाजत और इसी खूनी क्रूरता का अंत करने के लिए ईरान की सैन्य शक्ति को कुचलना बेहद जरूरी था।