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March 20 2026 09:36 am

US Iran Conflict : क्या ट्रंप ने खोया आपा? अचानक रद्द किया चीन दौरा, होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के बीच उठाया बड़ा कदम

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News India Live, Digital Desk : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक हालिया फैसले ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप ने अपना बहुप्रतीक्षित चीन दौरा (China Trip) अचानक स्थगित कर दिया है। इस फैसले के पीछे न केवल व्यापारिक मतभेद बताए जा रहे हैं, बल्कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ता सैन्य तनाव भी एक बड़ी वजह बनकर उभरा है। राजनीतिक विश्लेषक अब यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या राष्ट्रपति ट्रंप वैश्विक दबाव में अपना धैर्य खो रहे हैं?

चीन दौरा रद्द होने के पीछे की असली वजह

राष्ट्रपति ट्रंप का बीजिंग दौरा दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों को सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा था। हालांकि, अंतिम समय में इसे टालने के पीछे 'सुरक्षा कारणों' और 'अधूरे समझौतों' का हवाला दिया गया है।

ट्रेड वॉर की आहट: सूत्रों का कहना है कि टैरिफ और तकनीक चोरी के मुद्दों पर चीन के अड़ियल रवैये से ट्रंप काफी नाराज हैं।

रणनीतिक बदलाव: व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि जब तक ठोस नतीजे मिलने की उम्मीद नहीं होगी, तब तक राष्ट्रपति कोई औपचारिक बातचीत नहीं करेंगे।

होर्मुज जलडमरूमध्य: युद्ध के मुहाने पर दुनिया?

ट्रंप के इस फैसले का एक बड़ा लिंक मध्य पूर्व (Middle East) से जुड़ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान और अमेरिकी नौसेना के बीच बढ़ती तनातनी ने युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दी है।

तेल की सप्लाई पर खतरा: दुनिया के एक-तिहाई कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका अपने हितों और जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है।

सैन्य तैनाती: अमेरिका ने इलाके में अतिरिक्त युद्धपोत और फाइटर जेट्स तैनात करने के आदेश दिए हैं, जिससे बीजिंग जाने के बजाय ट्रंप का पूरा ध्यान अब वॉर-रूम पर है।

विपक्ष और विशेषज्ञों की राय

ट्रंप के इस आक्रामक रुख पर अमेरिका के भीतर भी तीखी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं। उनके आलोचकों का कहना है कि बिना किसी ठोस योजना के दौरे रद्द करना और सैन्य धमकी देना अमेरिकी कूटनीति के लिए अच्छा नहीं है। वहीं, ट्रंप समर्थकों का मानना है कि यह 'अमेरिका फर्स्ट' (America First) की नीति है और राष्ट्रपति किसी भी देश के सामने झुकने को तैयार नहीं हैं।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या होगा असर?

अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें (Crude Oil Prices) आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे देशों के लिए यह एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकती है। ट्रंप और चीन के बीच की यह दूरी वैश्विक शेयर बाजारों में भी गिरावट ला सकती है।