US Bases Destroyed : हमारे ठिकाने तबाह हो गए, अब भारत ही आखिरी सहारा पूर्व अमेरिकी कर्नल का चौंकाने वाला खुलासा

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News India Live, Digital Desk: खाड़ी देशों में अमेरिका की पकड़ कमजोर होती दिख रही है। ईरान के मिसाइल हमलों ने कतर, जॉर्डन और यूएई में स्थित कई अमेरिकी सैन्य बेस (Airbases) को भारी नुकसान पहुंचाया है। ऐसी स्थिति में, अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ अब भारत को एक सुरक्षित और रणनीतिक 'लॉजिस्टिक हब' के रूप में देख रहे हैं।

1. पूर्व कर्नल का बड़ा दावा (The Bold Claim)

एक अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ चैनल को दिए इंटरव्यू में पूर्व अमेरिकी कर्नल ने कहा:

ठिकानों की तबाही: "ईरान की 'फत्ताह' और 'खैबर' मिसाइलों ने हमारे प्रमुख एयरबेसों को लगभग बेकार कर दिया है। हमारे लड़ाकू विमानों को ईंधन भरने और मरम्मत के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल रहे हैं।"

भारत पर निर्भरता: "भौगोलिक और तकनीकी रूप से, भारत ही वह शक्ति है जो इस समय हमारी मदद कर सकती है। हमें अपने ऑपरेशंस जारी रखने के लिए भारतीय समुद्री और हवाई ठिकानों (Bases) की जरूरत पड़ सकती है।"

2. अमेरिका के लिए 'हिंद महासागर' क्यों है जरूरी?

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की वर्तमान रणनीति अब 'बैकअप' प्लान पर टिकी है:

सुरक्षित दूरी: भारतीय बेस ईरान की मिसाइल रेंज से तुलनात्मक रूप से सुरक्षित दूरी पर हैं।

लॉजिस्टिक सपोर्ट: भारत के पास आधुनिक मरम्मत केंद्र और रिफ्यूलिंग क्षमताएं हैं जो अमेरिकी नौसेना और वायुसेना के काम आ सकती हैं।

3. भारत का स्टैंड: क्या मिलेगी अनुमति? (India's Dilemma)

हालाँकि अमेरिकी विशेषज्ञ भारत की ओर देख रहे हैं, लेकिन भारत सरकार के लिए यह फैसला आसान नहीं है:

रणनीतिक स्वायत्तता: भारत ने हमेशा कहा है कि वह किसी भी देश के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल नहीं होने देगा।

ईरान से संबंध: भारत के ईरान के साथ मजबूत व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध हैं। अमेरिकी सेना को बेस देने का मतलब होगा ईरान के साथ सीधे दुश्मनी मोल लेना।

विदेश मंत्रालय का रुख: भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) पहले ही इन दावों को 'निराधार' बता चुका है कि भारत ने अपने बेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी है।

4. रक्षा समझौतों की भूमिका (LEMOA & COMCASA)

भारत और अमेरिका के बीच LEMOA (Logistics Exchange Memorandum of Agreement) जैसे समझौते पहले से मौजूद हैं।

इन समझौतों के तहत दोनों देश एक-दूसरे के बेस का उपयोग 'रसद' (ईंधन, भोजन, मरम्मत) के लिए कर सकते हैं।

कर्नल के दावे के पीछे शायद यही तर्क है कि संकट के समय अमेरिका इन समझौतों का इस्तेमाल कर भारत से मदद मांग सकता है।

5. वैश्विक राजनीति पर असर

अगर भारत ने अमेरिका को किसी भी तरह की सैन्य मदद दी, तो इससे रूस और चीन के साथ भारत के संबंधों पर भी असर पड़ सकता है। यह कदम ब्रिक्स (BRICS) और शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में भारत की स्थिति को बदल सकता है।