पटना मेडिकल कॉलेज में हंगामा क्या डॉक्टरों ने दी एनेस्थीसिया की डबल डोज़? मासूम की मौत से उठे गंभीर सवाल
News India Live, Digital Desk : बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसे सुनकर किसी का भी दिल बैठ जाए। हम सरकारी अस्पतालों में बड़ी उम्मीद लेकर जाते हैं कि वहां अच्छे डॉक्टर और सस्ता इलाज मिलेगा। लेकिन पटना मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (PMCH), जो राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल माना जाता है, वहां एक 3 साल की बच्ची के साथ जो हुआ, उसने फिर से बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
जिस बच्ची को सिर्फ़ पैर की हड्डी टूटने (फ्रैक्चर) के इलाज के लिए भर्ती कराया गया था, वह अब इस दुनिया में नहीं है। परिवार का आरोप है कि यह मौत बीमारी से नहीं, बल्कि डॉक्टरों की लापरवाही और एनेस्थीसिया (Anesthesia) की गलत खुराक देने से हुई है।
आइये, जानते हैं कि आखिर ऑपरेशन थियेटर के बंद दरवाजों के पीछे उस दिन क्या हुआ था।
हंसती-खेलती अवंतिका के साथ क्या हुआ?
गोपालगंज जिले की रहने वाली 3 साल की अवंतिका राय घर में खेलते-खेलते गिर गई थी। इस हादसे में उसके दोनों पैरों की जांघ की हड्डी (Thigh Bone) टूट गई। बेहतर इलाज की आस में घरवाले उसे पटना लेकर आए और PMCH के हड्डी रोग विभाग (Orthopedics Department) में भर्ती कराया। यहाँ वह डॉ. महेश प्रसाद की यूनिट में थी।
उस दिन की कहानी
परिजनों के मुताबिक, बच्ची का ऑपरेशन किया जाना था। ऑपरेशन के लिए उसे बेहोश करना जरूरी था। आरोप है कि ऑपरेशन थिएटर में सीनियर डॉक्टर मौजूद नहीं थे और जूनियर डॉक्टरों ने बच्ची को एनेस्थीसिया का इंजेक्शन दिया।
परिजनों का कहना है, "डॉक्टरों से गलती हुई और उन्होंने हमारी बच्ची को एनेस्थीसिया की 'डबल डोज़' (High Dose) या ओवरडोज दे दी।"
इतनी छोटी सी जान इतनी भारी दवाई बर्दाश्त नहीं कर सकी। ऑपरेशन के बाद उसे होश ही नहीं आया। उसकी हालत बिगड़ती गई और दिल ने काम करना बंद कर दिया। आनन-फानन में उसे सीपीआर दिया गया और वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन 6 दिसंबर (शुक्रवार) को उसने हमेशा के लिए आंखें मूंद लीं।
"जूनियर डॉक्टर सीख रहे थे?"
बच्ची के नाना ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है। उनका कहना है कि जब ऑपरेशन हो रहा था, तो वहां कोई जिम्मेदार प्रोफेसर या सीनियर डॉक्टर नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे जूनियर डॉक्टर उनकी बच्ची पर प्रैक्टिकल कर रहे थे।
अस्पताल प्रशासन का एक्शन
इस घटना के बाद जब हंगामा मचा, तब जाकर अस्पताल प्रशासन जागा है। PMCH के अधीक्षक डॉ. आई.एस. ठाकुर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 4 सदस्यों की एक जांच टीम बना दी है। इसमें एनेस्थीसिया, हड्डी रोग और शिशु रोग विभाग के विभागाध्यक्ष (HOD) शामिल हैं।
यह टीम जांच करेगी कि:
- क्या वाकई एनेस्थीसिया की डोज़ ज्यादा थी?
- ऑपरेशन के वक्त सीनियर डॉक्टर वहां क्यों नहीं थे?
- बच्ची की मौत की असली वजह क्या है?
रिपोर्ट आने में दो हफ्ते लग सकते हैं। लेकिन कड़वा सच यह है कि जांच चाहे जो भी कहे, वो परिवार अपनी बच्ची को अब कभी वापस नहीं पा सकेगा।
हमारी बात
दोस्तों, एनेस्थीसिया देना मेडिकल साइंस का सबसे नाज़ुक काम होता है। एक मिलीग्राम की भी गड़बड़ी जानलेवा हो सकती है। अगर वाकई में यह लापरवाही है, तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आगे किसी और 'अवंतिका' के साथ ऐसा न हो।