UPI Payment Rules 2026: क्या ₹2000 से ऊपर के ट्रांजैक्शन पर लगेगा चार्ज? जानें UPI के नए नियम और अपनी जेब पर पड़ने वाला असर

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नई दिल्ली। भारत में डिजिटल क्रांति का चेहरा बन चुका UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) अब एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। हाल ही में UPI भुगतान से जुड़े नियमों में हुए बदलावों ने आम जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है। सबसे ज्यादा चर्चा ₹2000 से अधिक के ट्रांजैक्शन पर लगने वाले संभावित शुल्क को लेकर है। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों के बीच उपभोक्ता इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि क्या अब हर छोटे-बड़े भुगतान के लिए उन्हें अतिरिक्त जेब ढीली करनी होगी। अमर उजाला की इस विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे इन नियमों का असली सच और यह भी कि आपको घबराने की जरूरत क्यों नहीं है।

₹2000 वाला नियम: किसे देना होगा चार्ज और किसे नहीं?

सबसे पहले यह समझ लेना जरूरी है कि UPI के नए नियम हर ट्रांजैक्शन पर लागू नहीं होते। नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के दिशा-निर्देशों के अनुसार, चार्ज केवल उन ट्रांजैक्शन पर लग सकता है जो प्रीपेड पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स (PPI) जैसे कि डिजिटल वॉलेट (PhonePe Wallet, Paytm Wallet आदि) के माध्यम से किए जाते हैं।

P2P (व्यक्ति से व्यक्ति): यदि आप अपने किसी दोस्त या रिश्तेदार को ₹2000 या उससे ज्यादा पैसे भेजते हैं, तो यह पूरी तरह निशुल्क रहेगा।

P2M (व्यक्ति से व्यापारी): यदि आप किसी दुकानदार को अपने वॉलेट के जरिए ₹2000 से अधिक का भुगतान करते हैं, तो वहां 'इंटरचेंज फीस' लागू हो सकती है। लेकिन, यह शुल्क दुकानदार को देना होगा, ग्राहक को नहीं।

दुकानदारों और व्यापारियों पर क्या होगा असर?

इन बदलावों का सबसे सीधा असर उन व्यापारियों पर पड़ने की संभावना है जो बड़े पैमाने पर वॉलेट के जरिए भुगतान स्वीकार करते हैं। ₹2000 से अधिक के वॉलेट ट्रांजैक्शन पर लगने वाला इंटरचेंज शुल्क व्यापारियों की लागत बढ़ा सकता है। हालांकि, सीधे बैंक खाते से बैंक खाते (Bank to Bank) में किए जाने वाले UPI भुगतान पर अभी भी कोई शुल्क नहीं है। ऐसे में छोटे दुकानदार ग्राहकों को सीधे बैंक ट्रांसफर के लिए प्रेरित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था डिजिटल इकोसिस्टम को बनाए रखने के लिए जरूरी तकनीकी खर्चों की भरपाई हेतु की गई है।

सावधानी ही सुरक्षा: UPI इस्तेमाल करते समय रखें ये ध्यान

डिजिटल पेमेंट को सुरक्षित रखने के लिए उपभोक्ताओं को कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना चाहिए:

भुगतान का तरीका: कोशिश करें कि बड़े भुगतान सीधे अपने लिंक किए गए बैंक खाते से ही करें, जिससे वॉलेट ट्रांजैक्शन वाले नियमों का आप पर कोई असर न पड़े।

पिन (PIN) सुरक्षा: अपना UPI पिन कभी किसी के साथ साझा न करें। याद रखें, पैसे प्राप्त करने के लिए पिन डालने की जरूरत नहीं होती।

आधिकारिक ऐप: हमेशा मान्यता प्राप्त और आधिकारिक UPI ऐप्स का ही उपयोग करें और समय-समय पर अपना पिन बदलते रहें।

ट्रांजैक्शन लिमिट: सुरक्षा के लिहाज से अपने ऐप में दैनिक ट्रांजैक्शन लिमिट सेट करें ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में बड़ा नुकसान न हो।

डिजिटल पेमेंट का भविष्य और बदलती अर्थव्यवस्था

नियमों में यह बदलाव इस बात का संकेत है कि भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम अब मैच्योर हो रहा है। सरकार का लक्ष्य 2026 तक देश को पूरी तरह पारदर्शी और कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाना है। आने वाले समय में UPI में 'ऑटो-पे' और अंतरराष्ट्रीय भुगतान जैसी सुविधाएं और भी सरल होने वाली हैं। हालांकि नई शुल्क व्यवस्था से शुरुआती हिचकिचाहट हो सकती है, लेकिन लंबी अवधि में यह सिस्टम को अधिक टिकाऊ और सुरक्षित बनाएगा।