BREAKING:
April 17 2026 06:54 pm

महिला आरक्षण बिल पर अखिलेश यादव का PDA दांव हक मारने की बड़ी साजिश, भाजपा के खिलाफ बुना नया जाल

Post

News India Live, Digital Desk : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे महिला आरक्षण बिल को लेकर तीखा हमला बोला है। अखिलेश ने इस कदम को भाजपा की 'चुनावी घबराहट' करार देते हुए आरोप लगाया कि यह 'PDA' (पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक) के अधिकारों को खत्म करने की एक बड़ी साजिश है। उन्होंने सोशल मीडिया और जनसभाओं के जरिए सरकार को घेरते हुए कहा कि भाजपा इस बिल के बहाने असल मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहती है।

'जनगणना टालना ही मुख्य मकसद'

अखिलेश यादव ने सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस बिल को लागू करने के लिए जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की शर्त रखना केवल इसे लटकाने का एक तरीका है। उन्होंने कहा:

आधी आबादी का अपमान: जब 2011 की जनगणना के आधार पर बिल लाया जा रहा है, तो 2026 की वर्तमान जनसंख्या को नजरअंदाज क्यों किया जा रहा है?

दशकों का इंतजार: अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा ऐसा कानून ला रही है जिसे लागू होने में दशकों लग जाएंगे, ताकि वर्तमान में उन्हें पिछड़ों को उनका हक न देना पड़े।

PDA के लिए अलग आरक्षण की मांग

सपा मुखिया ने मांग की है कि महिला आरक्षण के भीतर OBC, SC और ST महिलाओं के लिए अलग से कोटा निर्धारित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिना 'कोटे के भीतर कोटा' के, यह बिल केवल खास वर्ग की महिलाओं तक सीमित रह जाएगा और PDA समाज की महिलाएं मुख्यधारा से बाहर रहेंगी। अखिलेश के इस रुख को मेरठ, नोएडा और पश्चिमी यूपी के उन क्षेत्रों में ओबीसी वोट बैंक को एकजुट करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जहां हाल ही में श्रमिक आंदोलन और जातीय समीकरण गरमाए हुए हैं।

भाजपा पर 'पिछला दरवाजा राजनीति' का आरोप

अखिलेश ने भाजपा पर हमलावर होते हुए कहा कि सरकार मेडिकल यूनिवर्सिटी से लेकर नौकरियों तक में पिछले दरवाजे से आरक्षण छीन रही है। उन्होंने मेरठ और नोएडा के युवाओं और महिलाओं को आगाह किया कि भाजपा का यह 'महिला प्रेम' केवल 2029 के चुनावों को ध्यान में रखकर बुना गया एक भ्रम है। उन्होंने दोहराया कि सपा जातिगत जनगणना की अपनी मांग पर अडिग है और बिना इसके किसी भी आरक्षण का पूर्ण लाभ पिछड़ों को नहीं मिल सकता।

मायावती का भी मिला साथ!

दिलचस्प बात यह है कि इस मुद्दे पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी अखिलेश के सुर में सुर मिलाया है। उन्होंने भी SC-ST और OBC महिलाओं के लिए अलग आरक्षण और कुल रिजर्वेशन को बढ़ाकर 50% करने की मांग की है। विपक्ष के इस एकजुट रुख ने उत्तर प्रदेश में एक बार फिर आरक्षण की राजनीति को केंद्र में ला दिया है।