UP Politics : जब बृजभूषण शरण सिंह के इस कबूलनामे से मच गया था हड़कंप, जानें कैसे मर्डर केस से हुए थे बरी?
News India Live, Digital Desk: भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह अक्सर अपने बेबाक और विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक समय उन्होंने कैमरे के सामने सार्वजनिक रूप से हत्या की बात स्वीकार की थी? इस सनसनीखेज खुलासे ने न केवल राजनीति बल्कि कानूनी गलियारों में भी तूफान ला दिया था। आइए जानते हैं क्या था वो पूरा मामला और कैसे वह इस गंभीर केस से बाहर निकले।
क्या था वो चर्चित इंटरव्यू?
साल 2022 के एक इंटरव्यू के दौरान, जब उनसे उनके अतीत और आपराधिक मामलों के बारे में पूछा गया, तो बृजभूषण सिंह ने बेझिझक कहा था, "मेरे हाथ से एक हत्या हुई है।" उन्होंने बताया कि यह घटना तब हुई थी जब उनके एक करीबी साथी की हत्या कर दी गई थी, और उसी के प्रतिशोध में उन्होंने सामने वाले पर गोली चलाई थी।
कानूनी पेंच: कबूलनामे के बावजूद कैसे मिली राहत?
अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि जब किसी ने खुद हत्या की बात मान ली, तो वह जेल क्यों नहीं गया? इसके पीछे मुख्य कानूनी कारण साक्ष्यों का अभाव (Lack of Evidence) और आत्मरक्षा (Self Defense) का तर्क रहा है।
पुराना मामला: यह घटना दशकों पुरानी थी। कानूनी प्रक्रिया में केवल मौखिक बयान (खासकर मीडिया के सामने दिया गया) तब तक सजा का आधार नहीं बनता, जब तक कि ठोस फोरेंसिक साक्ष्य या चश्मदीद गवाह अदालत में इसकी पुष्टि न करें।
कोर्ट का फैसला: जिस मामले (रवींद्र सिंह हत्याकांड) की चर्चा अक्सर की जाती है, उसमें निचली अदालत से लेकर ऊपरी अदालत तक बृजभूषण सिंह को सबूतों की कमी के कारण बरी कर दिया गया था।
राजनीतिक रसूख: उनके समर्थकों का मानना है कि उन पर लगे कई आरोप राजनीति से प्रेरित थे, जबकि विरोधियों का तर्क है कि उनके प्रभाव के कारण गवाह मुकर गए।
विवादों से पुराना नाता
बृजभूषण शरण सिंह का नाम केवल इस मर्डर केस तक सीमित नहीं रहा है। टाटा (TATA) हत्याकांड से लेकर हालिया महिला पहलवानों के यौन उत्पीड़न के आरोपों तक, उनका नाम कई बड़े विवादों से जुड़ा रहा है। हालांकि, अधिकतर मामलों में वह कानूनी रूप से सुरक्षित निकलने में सफल रहे हैं।