शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ FIR पर वकील का बड़ा दावा न सबूत हैं, न कोर्ट का आदेश जानें क्या है पूरा विवाद?

Post

News India Live, Digital Desk: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर चर्चा में हैं, लेकिन इस बार मामला कानूनी पचड़ों से जुड़ा है। हाल ही में उनके खिलाफ दर्ज हुई एक एफआईआर (FIR) को लेकर उनके वकील ने सनसनीखेज दावे किए हैं। वकील का कहना है कि जिस आधार पर यह मामला दर्ज किया गया है, उसमें कानूनी प्रक्रियाओं की धज्जियां उड़ाई गई हैं।

वकील का तर्क: "बिना सबूत और आदेश के दर्ज हुई FIR"

शंकराचार्य के कानूनी सलाहकार ने मीडिया से बात करते हुए स्पष्ट किया कि अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ जो केस दर्ज कराया गया है, वह पूरी तरह निराधार है। उनके मुख्य तर्क निम्नलिखित हैं:

साक्ष्यों का अभाव: वकील के मुताबिक, एफआईआर की कॉपी में ऐसे किसी भी ठोस सबूत का जिक्र नहीं है जो शंकराचार्य को किसी भी गलत गतिविधि से जोड़ता हो।

कोर्ट के आदेश की अनुपस्थिति: आमतौर पर संवेदनशील मामलों में एफआईआर दर्ज करने के लिए कोर्ट का निर्देश या प्रारंभिक जांच जरूरी होती है। वकील का दावा है कि इस मामले में किसी भी न्यायिक आदेश का पालन नहीं किया गया।

कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन: रक्षा पक्ष का कहना है कि यह केवल छवि खराब करने की कोशिश है और कानूनी रूप से यह मामला टिकने वाला नहीं है।

क्या है पूरा मामला?

विवाद की जड़ें पिछले कुछ समय से चल रहे धार्मिक और संपत्ति संबंधी विवादों से जुड़ी बताई जा रही हैं। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने प्रखर बयानों और सनातन धर्म की रक्षा के लिए जाने जाते हैं। हाल के दिनों में उनके कुछ कदमों ने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा की थी, जिसके बाद यह कानूनी कार्रवाई सामने आई है।

आगे क्या होगा?

शंकराचार्य की कानूनी टीम अब इस एफआईआर को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। वकील ने संकेत दिए हैं कि वे इस मामले को रद्द (Quash) कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं। इस खबर के बाद उनके समर्थकों में भारी आक्रोश है और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।