UP Politics : उत्तर प्रदेश में चुनावी टेंशन शुरू 16 महीने बाकी और पार्टियाँ अचानक क्यों खेलने लगी हैं जाति का खेल
News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर गर्मागर्मी दिखने लगी है, और इसकी वजह है विधानसभा चुनावों का करीब आना. खबर है कि चुनाव में अब सिर्फ 16 महीने लेख के संदर्भ में बचे हैं और सभी राजनीतिक पार्टियाँ अचानक से जातिगत समीकरणों को साधने में जुट गई हैं. ये वो समय होता है जब हर पार्टी अपने पारंपरिक वोट बैंक को मज़बूत करने और दूसरों के वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी कोशिश करती है.
प्रदेश में चुनाव अभी दूर दिख रहे हों, लेकिन पार्टियों के अंदरूनी समीकरण और बाहरी रणनीतियाँ बननी शुरू हो गई हैं. यहाँ की राजनीति में जाति का खेल हमेशा से बहुत अहम रहा है. किसी भी सीट पर जीतने या हारने में उम्मीदवार की जाति, क्षेत्र में उस जाति के लोगों की संख्या और उनके वोट पैटर्न की बहुत बड़ी भूमिका होती है. इसीलिए नेताजी से लेकर उनके समर्थक तक हर वर्ग, हर जाति के लोगों को अपने पाले में लाने की जद्दोजहद शुरू कर देते हैं.
इस दौरान अचानक से विभिन्न जातियों के बड़े नेताओं की मुलाक़ातें बढ़ जाती हैं, सामाजिक सम्मेलनों का दौर तेज़ हो जाता है, और पार्टियों के घोषणापत्रों में भी उन्हीं मुद्दों को तरजीह दी जाने लगती है जो किसी ख़ास जाति समूह को सीधे प्रभावित करते हैं. हर कोई अपने पाले में ज़्यादा से ज़्यादा वोटरों को खींचने की होड़ में है. चाहे वो सत्ताधारी दल हो या विपक्षी, सबको पता है कि उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में सरकार बनाने या बिगाड़ने में जातिगत वोटिंग एक बड़ा फ़ैक्टर है. अब तो यह देखना दिलचस्प होगा कि अगले कुछ महीनों में ये पार्टियाँ अपने इन 'जातिगत समीकरणों' को कितनी बखूबी साध पाती हैं, क्योंकि चुनाव तक दांव-पेच और बदलेंगे, और फिर नतीजे ही बताएंगे कि किसने सही निशाना साधा.