UP Defence Corridor : नवाबों का शहर अब बनाएगा ब्रह्मास्त्र लखनऊ से निकली दुनिया की सबसे खतरनाक मिसाइल की पहली खेप

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News India Live, Digital Desk: कल तक हम लखनऊ को 'नवाबों के शहर', 'कबाबों' और 'अदब' के लिए जानते थे, लेकिन आज से इस शहर की एक नई और बेहद ताकतवर पहचान बन गई है. यह पहचान है दुश्मन के दिलों में खौफ पैदा करने वाली दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' की.

शुक्रवार का दिन उत्तर प्रदेश और पूरे देश के लिए ऐतिहासिक बन गया, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में बनी ब्रह्मोस मिसाइल की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर भारतीय सेना के लिए रवाना किया. यह सिर्फ एक मिसाइल की डिलीवरी नहीं है, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' और बदलते-उभरते उत्तर प्रदेश की एक ज़बरदस्त तस्वीर है.

क्यों पूरी दुनिया में है ब्रह्मोस का खौफ?

ब्रह्मोस कोई मामूली मिसाइल नहीं है. इसे भारत और रूस ने मिलकर बनाया है. यह 'दागो और भूल जाओ' (Fire and Forget) सिद्धांत पर काम करती है, यानी एक बार इसे लॉन्च करने के बाद इसे किसी गाइडेंस की ज़रूरत नहीं पड़ती. यह अपने लक्ष्य को खुद ढूंढकर तबाह कर देती है.

  • रफ़्तार: इसकी सबसे बड़ी ताकत है इसकी रफ़्तार. यह आवाज़ की गति से भी लगभग तीन गुना (Mach 2.8) ज़्यादा तेज़ी से उड़ती है. इस रफ़्तार की वजह से दुश्मन के किसी भी एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे पकड़ पाना लगभग नामुमकिन है.
  • सटीकता: यह मिसाइल पिन-पॉइंट सटीकता के साथ अपने टारगेट पर हमला करती है. इसे ज़मीन, हवा, जहाज़ या पनडुब्बी, कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है.

लखनऊ कैसे बना मिसाइल का नया 'घर'?

यह सब संभव हुआ है उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर की वजह से. लखनऊ में 'ब्रह्मोस एयरोस्पेस' का यह नया केंद्र इसी कॉरिडोर का एक हिस्सा है. यहाँ अब हर साल 80 से 100 ब्रह्मोस मिसाइलें बनाई जाएंगी. इस प्रोजेक्ट से न सिर्फ देश की रक्षा ताकत बढ़ेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा होंगे.

इस मौके पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं, बल्कि भारत की तकनीकी शक्ति का प्रतीक है, जो अब लखनऊ में बन रहा है. वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ ने इसे 'मेक इन इंडिया' मिशन के तहत यूपी के लिए एक गौरव का क्षण बताया.

अब दुश्मन को हमला करने से पहले सौ बार सोचना होगा, क्योंकि अब सिर्फ दिल्ली से ही नहीं, नवाबों के शहर लखनऊ से भी 'ब्रह्मास्त्र' उन तक पहुँच सकता है.