लखनऊ में बेचैनी, दिल्ली में मंथन, सीएम योगी अचानक क्यों पहुंचे पीएम दरबार? क्या होने वाला है बड़ा खेला?

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News India Live, Digital Desk : लखनऊ की सर्दी के बीच सियासी पारा अचानक चढ़ गया है। वजह है उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दिल्ली दौरा। जब भी 'महाराज जी' (सीएम योगी) लखनऊ से दिल्ली की फ्लाइट पकड़ते हैं, तो सियासी गलियारों में कानाफूसी शुरू हो जाती है। इस बार चर्चा का मुद्दा गर्म है मंत्रिमंडल विस्तार (Cabinet Expansion)।

पिछले काफी समय से यह बात हवा में है कि यूपी सरकार में कुछ बड़े बदलाव होने वाले हैं, और योगी के इस दौरे ने इन अफवाहों को हकीकत के और करीब ला दिया है।

दिल्ली में किसके साथ है मीटिंग?
खबर है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का शेड्यूल दिल्ली में काफी व्यस्त है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। इसके अलावा बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और यूपी बीजेपी के प्रभारी नितिन नवीन से भी उनकी लंबी मंत्रणा होनी है।

जब प्रदेश का मुखिया, देश के मुखिया और पार्टी अध्यक्ष के साथ बंद कमरे में बैठता है, तो जाहिर है बात सिर्फ मौसम की नहीं होती।

क्यों हो रही है 'मंत्रिमंडल विस्तार' की चर्चा?
यूपी कैबिनेट में अभी भी कुछ जगहें खाली हैं। चर्चा है कि लोकसभा चुनावों के बाद से ही कुछ समीकरण साधने की कोशिश हो रही है।

  1. सहयोगियों को जगह: बीजेपी के सहयोगी दल (जैसे आरएलडी या अन्य) काफी समय से सत्ता में अपनी भागीदारी का इंतज़ार कर रहे हैं।
  2. नॉन-परफॉर्मर पर गाज: सूत्रों की मानें तो कुछ मंत्रियों के कामकाज की रिपोर्ट शायद अच्छी नहीं है। उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है और नए, ऊर्जावान चेहरों को टीम योगी में शामिल किया जा सकता है।
  3. उपचुनाव और जातीय समीकरण: आने वाले चुनावों को देखते हुए जातीय समीकरण साधने के लिए भी फेरबदल जरूरी माना जा रहा है।

नेताओं की धड़कनें तेज
जैसे ही योगी जी का हेलिकॉप्टर दिल्ली के लिए उड़ा, लखनऊ में कई मंत्रियों और विधायकों की नींद उड़ गई होगी। जो मंत्री बनने की कतार में हैं, वो उम्दा कपड़े पहनकर इंतज़ार कर रहे हैं, और जिन्हें कुर्सी जाने का डर है, वो भगवान से मना रहे हैं कि "बस इस बार बच जाएं।"

संगठन में भी बदलाव?
सिर्फ सरकार ही नहीं, संगठन (UP BJP) के लेवल पर भी कुछ पेंच कसे जाने की चर्चा है। प्रभारी नितिन नवीन के साथ बैठक का मतलब साफ है कि पार्टी के अंदरूनी ढांचे पर भी बात होगी। कौन जिला अध्यक्ष रहेगा, कौन हटेगा, इसकी भी लिस्ट शायद फाइनल हो रही हो।

फिलहाल, सबकी नजरें दिल्ली पर टिकी हैं। क्या योगी जी लखनऊ वापस लौटते समय अपनी 'नई टीम' की लिस्ट साथ लाएंगे? या फिर यह सिर्फ आगामी रणनीति पर चर्चा है? जो भी हो, अगले 24 से 48 घंटे यूपी की राजनीति के लिए बेहद अहम हैं।