भरोसा टूटा? एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन महज दिखावा, मेटा पर लगा यूजर्स की चैट पढ़ने का सनसनीखेज आरोप
News India Live, Digital Desk : सुबह उठते ही सबसे पहले हम क्या चेक करते हैं? जी हां, व्हाट्सएप (WhatsApp)। हमारे दिन की शुरुआत 'गुड मॉर्निंग' मैसेज से होती है और रात किसी खास से चैटिंग करते हुए गुजरती है। हम सभी यह मानकर चलते हैं कि हमारी बातें सिर्फ हमारे और सामने वाले के बीच हैं। वजह है वह सुनहरी पट्टी जिस पर लिखा होता है "End-to-End Encrypted" (एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन)।
लेकिन दोस्तों, अगर मैं आपसे कहूं कि यह 'ताला' शायद उतना मजबूत नहीं है जितना आप सोचते हैं, तो? अमेरिका (US) से आ रही एक खबर ने तकनीकी दुनिया में तहलका मचा दिया है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी मेटा (Meta), जो व्हाट्सएप की मालिक है, एक बार फिर कठघरे में खड़ी है।
मामला क्या है? (The Core Issue)
सीधी भाषा में समझें तो, एक पुरानी कहावत है दीवारों के भी कान होते हैं"। लेकिन यहां आरोप लगा है कि खुद दीवारें ही बातें सुन रही हैं। अमेरिका की एक कोर्ट में मेटा के खिलाफ मुकदमा (Lawsuit) दायर किया गया है।
इस मुकदमे में दावा किया गया है कि व्हाट्सएप भले ही दुनिया को यह बताता है कि "हम आपकी चैट नहीं पढ़ सकते", लेकिन असलियत कुछ और हो सकती है। आरोप है कि कंपनी के पास ऐसी तकनीकी खिड़कियां (Loopholes) मौजूद हैं, जिनके जरिए यूजर्स के डेटा और मैसेज तक पहुंचा जा सकता है।
"एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन" का सच या झूठ?
व्हाट्सएप हमेशा कहता है कि सेंडर और रिसीवर के अलावा बीच में कोई भी (यहाँ तक कि खुद व्हाट्सएप भी) आपके मैसेज नहीं पढ़ सकता। लेकिन याचिकाकर्ताओं का कहना है कि मेटा अपने विज्ञापन बिजनेस (Ad Business) को चमकाने के लिए डेटा का विश्लेषण (Data Analysis) करता है।
इसका मतलब यह नहीं कि कोई इंसान बैठकर आपके 'हाय-हलो' पढ़ रहा है, लेकिन आरोप है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) या एल्गोरिदम के जरिए कीवर्ड्स को स्कैन किया जा रहा हो सकता है, ताकि आपको उसी हिसाब से विज्ञापन दिखाए जा सकें।
यूजर्स के लिए डरने वाली बात क्या है?
देखिए, अगर यह आरोप सच साबित होते हैं, तो यह करोड़ों यूजर्स के विश्वासघात जैसा होगा। हम अपनी पर्सनल फोटोज़, बैंकिंग डीटेल्स और सीक्रेट बातें इस ऐप पर शेयर करते हैं। अगर एन्क्रिप्शन में जरा भी झोल है, तो यह प्राइवेसी का मज़ाक उड़ाने जैसा है।
हालांकि, मेटा ने अभी तक इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है और अपनी सुरक्षा को पुख्ता बताया है। लेकिन टेक्नोलॉजी की दुनिया में कहा जाता है"जब कोई चीज़ मुफ्त हो, तो समझ लीजिए कि उत्पाद आप ही हैं (If it's free, YOU are the product)।"
तो अब हम क्या करें?
घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क होना जरूरी है। अभी यह मामला कोर्ट में है। लेकिन एहतियात के तौर पर, बहुत ज्यादा संवेदनशील जानकारी (जैसे पासवर्ड, पिन, या अत्यंत निजी तस्वीरें) किसी भी मैसेजिंग ऐप पर शेयर करने से पहले दो बार सोचना चाहिए।
यह खबर यह याद दिलाने के लिए काफी है कि डिजिटल दुनिया में 'पूरी तरह सुरक्षित' कुछ भी नहीं होता। क्या इस खबर के बाद आपका व्हाट्सएप पर भरोसा कम हुआ है?