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April 19 2026 08:06 am

ट्रंप का ट्रुथ धमाका ईरान के साथ शांति समझौते की ओर बढ़े कदम, होर्मुज से नाटो तक दी बड़ी चेतावनी

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News India Live, Digital Desk: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक बार फिर अपनी 'आक्रामक कूटनीति' से हलचल मचा दी है। ईरान के साथ जारी भीषण तनाव के बीच ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कई बड़े दावे किए हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि ईरान के साथ एक ऐतिहासिक 'शांति समझौता' (Ceasefire Deal) करीब है, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य और नाटो (NATO) देशों को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है।

ईरान के साथ 10-दिवसीय 'सीजफायर' और पाकिस्तान की भूमिका

हालिया घटनाक्रम के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच 10 दिनों के अस्थायी संघर्ष-विराम पर सहमति बनी है। दिलचस्प बात यह है कि इस सौदे में पाकिस्तान ने महत्वपूर्ण मध्यस्थ (Mediator) की भूमिका निभाई है। ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख को "शानदार लोग" बताते हुए इस बातचीत को सफल बनाने के लिए धन्यवाद दिया है। सूत्रों के अनुसार, इस समझौते के तहत ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम (जिसे ट्रंप ने 'न्यूक्लियर डस्ट' कहा है) का भंडार अमेरिका को सौंपने पर विचार कर सकता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य: "दुनिया के खिलाफ हथियार नहीं बनेगा"

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), जो दुनिया के तेल व्यापार का सबसे संवेदनशील रास्ता है, उसे लेकर ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा, "ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह अब कभी होर्मुज को बंद नहीं करेगा। इसे अब दुनिया के खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।" हालांकि, शनिवार (18 अप्रैल) को ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रही, तो होर्मुज को फिर से बंद किया जा सकता है।

नाटो देशों को अल्टीमेटम: "मदद नहीं की तो भुगतना होगा"

ट्रंप का गुस्सा केवल ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके निशाने पर 'नाटो' के सहयोगी देश भी हैं। ट्रंप ने उन नाटो देशों को कड़ी चेतावनी दी है जिन्होंने मिडिल ईस्ट के इस संघर्ष में अमेरिका का साथ नहीं दिया और खुद को जंग से दूर रखा। उन्होंने संकेत दिया है कि जो देश सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं, उन्हें युद्ध की स्थिति में संसाधनों और सैन्य सहायता के साथ खड़ा होना होगा, अन्यथा अमेरिका अपने सैन्य गठबंधन की नीतियों पर दोबारा विचार कर सकता है।

भारत-पाकिस्तान और क्षेत्रीय स्थिरता

ट्रंप के बयानों में दक्षिण एशिया की स्थिरता का भी ज़िक्र रहा है। पाकिस्तान द्वारा ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता करने के बाद, क्षेत्र में पाकिस्तान का कूटनीतिक प्रभाव बढ़ता दिख रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि ईरान के साथ परमाणु समझौता (Nuclear Deal) सफल होता है, तो वह जल्द ही इस्लामाबाद का दौरा कर सकते हैं। भारत के संदर्भ में, होर्मुज का खुलना और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट (जो 9% तक गिर चुकी हैं) एक बड़ी आर्थिक राहत के तौर पर देखी जा रही है।

"सौदा नहीं हुआ तो तबाही तय"

अपनी चिर-परिचित शैली में ट्रंप ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि बुधवार (22 अप्रैल) तक ईरान के साथ कोई स्थायी समझौता नहीं होता है, तो सीजफायर को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि "बिना शर्त आत्मसमर्पण" (Unconditional Surrender) के बिना कोई स्थायी डील नहीं होगी। फिलहाल पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह 10 दिनों की शांति एक बड़े युद्ध को टाल पाएगी।