Trump vs Iran : सेना की हलचल और ट्रिगर वाली चेतावनी, क्या वाकई एक नए युद्ध की ओर बढ़ रही है दुनिया

Post

News India Live, Digital Desk: दुनिया अभी यूक्रेन और गजा की जंग से उबर भी नहीं पाई थी कि अब एक और मोर्चे पर बारूद की गंध आने लगी है। अमेरिका और ईरान के बीच बरसों पुरानी तल्खी अब एक नए और खतरनाक लेवल पर पहुंच गई है। हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा किया कि अमेरिकी सेना की मूवमेंट ईरान की ओर हो रही है। इस खबर के बाहर आते ही ईरान की ओर से जो जवाब आया, उसने माहौल को और भी गर्मा दिया है।

ईरान का साफ़ संदेश: "हमारा हाथ ट्रिगर पर है"

ईरान के सैन्य कमांडरों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि उनकी सेना 'हाई अलर्ट' पर है और उनकी उंगली 'ट्रिगर' पर है। इसका सीधा सा मतलब ये है कि वे किसी भी तरह के हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार बैठे हैं। अक्सर कूटनीति में ऐसी भाषा तब इस्तेमाल की जाती है जब पानी सिर के ऊपर से गुजरने लगता है। ईरान यह जताना चाहता है कि वह ट्रंप की 'दबाव बनाने वाली नीति' (Maximum Pressure Policy) से डरने वाला नहीं है।

ट्रंप की चाल और बढ़ता तनाव

डोनाल्ड ट्रंप ने हमेशा ईरान के प्रति सख्त रुख अपनाया है। चाहे वो न्यूक्लियर डील से बाहर निकलना हो या फिर आर्थिक प्रतिबंध लगाना। अब जब वे फिर से सुर्खियों में हैं और उनकी ओर से सेना को लेकर बड़े दावे किए जा रहे हैं, तो सवाल उठता है कि क्या ये वाकई हमले की तैयारी है या सिर्फ एक 'मनोवैज्ञानिक युद्ध' (Psychological Warfare)?

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि ट्रंप अक्सर ऐसे बयानों के जरिए सामने वाले को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश करते हैं। लेकिन ईरान का 'फिंगर ऑन ट्रिगर' वाला बयान यह बता रहा है कि वह इस बार बातचीत से ज्यादा जवाबी कार्यवाही के मूड में है।

दुनिया के लिए क्या हैं इसके खतरे?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का मतलब है मिडिल ईस्ट में अशांति। और इसका सीधा असर हम और आप पर पड़ता है। तेल की कीमतों में उछाल से लेकर ग्लोबल शेयर बाजार तक, सब कुछ इस क्षेत्र की शांति पर टिका है। अगर दोनों के बीच थोड़ी सी भी नोकझोंक होती है, तो उसका हर्जाना पूरी दुनिया को महंगाई के रूप में चुकाना पड़ेगा।

क्या डिप्लोमेसी को मिलेगा मौका?

इतनी कड़वाहट के बावजूद, पर्दे के पीछे हमेशा डिप्लोमेसी यानी बातचीत का एक दरवाजा खुला रहता है। सवाल ये है कि क्या ट्रंप और ईरान के नेता अपने अहंकार को पीछे रखकर शांति का रास्ता चुनेंगे? फिलहाल तो माहौल ऐसा है कि हर कोई सांसें रोककर देख रहा है कि अगला कदम किसका होगा