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April 20 2026 12:08 am

ट्रंप ने खेला सबसे बड़ा दांव, गाजा में शांति के लिए अब मोदी ही आखिरी उम्मीद?

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News India Live, Digital Desk: जब बात दुनिया में शांति लाने की हो, तो अक्सर बड़े देशों का मुंह अमेरिका की तरफ होता है। लेकिन इस बार बाजी पलट गई है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक ऐसा इशारा किया है जो साबित करता है कि आज के दौर में भारत का कद कितना बड़ा हो चुका है। ट्रंप ने गाजा और इजराइल (Israel-Gaza War) के बीच चल रही न खत्म होने वाली लड़ाई को रोकने और वहां की सूरत बदलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार को एक खास न्योता भेजा है।

यह न्योता है'Gaza Peace Board' (गाजा शांति बोर्ड) में शामिल होने का।

सुनने में यह जितना बड़ा लग रहा है, असल में यह जिम्मेदारी उससे भी कहीं ज्यादा भारी है। आइए, आसान भाषा में समझते हैं कि यह पूरा माजरा क्या है और ट्रंप को भारत की याद क्यों आई।

आखिर क्या है यह 'गाजा पीस बोर्ड'?
डोनल्ड ट्रंप के ऑफिस से एक '20-पॉइंट प्लान' की बात सामने आ रही है। इस प्लान का मुख्य मकसद गाजा से युद्ध को खत्म करना और वहां की तबाही को समेटना है। ट्रंप का प्लान है कि युद्ध के बाद गाजा को कैसे चलाया जाए, इसके लिए एक खास कमेटी या बोर्ड बनाया जाए।

इस बोर्ड का काम सिर्फ बातें करना नहीं होगा। इसे जिम्मेदारी मिलेगी गाजा के पुनर्निर्माण (Reconstruction) की, वहां फिर से सिस्टम खड़ा करने की और यह पक्का करने की कि वहां दोबारा आतंकवाद सिर न उठा सके। अमेरिका चाहता है कि इस बोर्ड में उसकी निगरानी रहे, लेकिन साथ में दुनिया के वो ताकतवर देश शामिल हों जिन पर इजराइल और अरब दुनिया, दोनों भरोसा करते हों।

भारत को ही क्यों चुना गया?
आप सोच रहे होंगे कि इस लड़ाई से तो हमारा सीधा कोई लेना-देना नहीं, फिर हम क्यों? इसके पीछे एक बहुत सोची-समझी रणनीति है।

  1. दोनों पक्षों का भरोसा: पूरी दुनिया में भारत शायद उन चुनिंदा देशों में से एक है जिसकी दोस्ती इजराइल के साथ 'भाई' जैसी है, तो वहीं अरब देशों और फिलिस्तीन के साथ भी हमारे रिश्ते बहुत पुराने और मजबूत हैं। पीएम मोदी की बात नेतन्याहू भी सुनते हैं और गल्फ के लीडर्स भी।
  2. भारत की साख: दुनिया जानती है कि भारत किसी देश पर अपना एजेंडा नहीं थोपता। हम वहां विकास और इंसानियत के नाते जाते हैं। ट्रंप को पता है कि अगर वहां शांति लानी है, तो एक ऐसा न्यूट्रल (निष्पक्ष) देश चाहिए जिस पर कोई शक न करे।

अब आगे क्या होगा?
खबरों के मुताबिक, इस बोर्ड में अमेरिका और इजराइल के अलावा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और सऊदी अरब जैसे देशों के भी शामिल होने की चर्चा है। ऐसे पावरफुल ग्रुप में भारत का शामिल होना बताता है कि हम अब दुनिया के 'डिसीजन मेकिंग' रूम में बैठ चुके हैं।

हालांकि, भारत सरकार ने अभी इस पर कोई आधिकारिक 'हां' या 'ना' नहीं कहा है। भारत हमेशा से ही अपनी शर्तों पर और फूंक-फूंक कर कदम रखने के लिए जाना जाता है। लेकिन अगर भारत इस रोल को स्वीकार करता है, तो यह वैश्विक राजनीति में हमारा अब तक का सबसे बड़ा रोल होगा। गाजा की गलियों में अगर शांति भारत के सहयोग से लौटती है, तो इतिहास में यह सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।

यह वाकई गर्व की बात है कि दुनिया की सबसे बड़ी समस्या का हल अब दुनिया भारत की तरफ देख कर तलाश रही है।