मणिपुर हिंसा का वो घाव जो भरा नहीं ,गैंगरेप सर्वाइवर की मौत ने खड़े किए कड़वे सवाल
News India Live, Digital Desk: आज दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। मणिपुर हिंसा के दौरान, मई 2023 में जब हालात सबसे ज्यादा खराब थे, तब एक 22 साल की कूकी समुदाय की युवती के साथ चूरूचंदपुर में कुछ दरिंदों ने गैंगरेप (सामूहिक दुष्कर्म) जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया था। वो किसी तरह उस वक्त बच तो गई थी, लेकिन अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी।
करीब डेढ़-दो साल तक वो इस सदमे (Trauma) से लड़ती रही, लेकिन आखिर में उसका हौसला जवाब दे गया।
दर्द जब बर्दाश्त से बाहर हो गया
खबरों के मुताबिक, हिंसा का शिकार हुई यह युवती पिछले काफी समय से डिप्रेशन से जूझ रही थी। उसके जहन से उस दिन की वो खौफनाक यादें मिट नहीं पा रही थीं। शायद उसे लग रहा था कि अब इस दर्द के साथ जीना मुमकिन नहीं है। इसी मानसिक तनाव के चलते, 10 दिसंबर 2024 को उसने खुद को आग के हवाले कर लिया।
बताया जा रहा है कि वो बुरी तरह से जल चुकी थी। उसे बचाने की हर मुमकिन कोशिश की गई। पहले उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर असम के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। 11 दिनों तक वो जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही, लेकिन 21 दिसंबर को वो जंग हार गई और उसकी मौत हो गई।
क्या कहते हैं लोग?
वहां के स्थानीय संगठन (ITLF) ने इस पर बहुत दुख जताया है। उनका कहना है कि 3 मई 2023 को जब हिंसा भड़की थी, तब भीड़ ने उस लड़की को पकड़ लिया था और उसके साथ यह दरिंदगी की थी। पुलिस ने मामला तो दर्ज किया, जांच एजेंसियों (CBI/SIT) को केस सौंपा गया, लेकिन उस लड़की के मन पर लगे घाव कभी भर नहीं पाए।
ये सवाल हम सब के लिए है
सोचिए, वो लड़की रिलीफ कैंप और अस्पतालों के चक्कर काट रही थी, लेकिन जो डर उसके अंदर बैठ गया था, उसने आखिरकार उसकी जान ले ली। उसका शव अब दीमापुर लाया गया है ताकि उसका अंतिम संस्कार किया जा सके।
मणिपुर में शांति लौटने के दावे चाहे कितने भी किए जाएं, लेकिन जब तक ऐसी खबरें आती रहेंगी, हमें यह याद दिलाती रहेंगी कि हिंसा की कीमत हमेशा मासूमों को चुकानी पड़ती है—कभी अपनी जान देकर, तो कभी अपनी रूह को मार कर। क्या हम बतौर समाज इन बेटियों को सुरक्षा और मानसिक शांति देने में नाकाम रहे हैं?