Trump Assassination Plot : मेरे पास कोई चारा नहीं था, पाकिस्तानी आसिफ मर्चेंट का कोर्ट में दावा,ईरान ने परिवार को दी थी धमकी

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News India Live, Digital Desk: न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में चल रहे इस हाई-प्रोफाइल ट्रायल के दौरान 47 वर्षीय आसिफ मर्चेंट ने बुधवार को जूरी के सामने अपनी बात रखी। उसने स्वीकार किया कि उसने अमेरिकी नेताओं को निशाना बनाने की योजना बनाई थी, लेकिन इसके पीछे उसकी मर्जी नहीं बल्कि 'ईरानी दबाव' था।

1. "परिवार को बचाने के लिए रची साजिश" (Family Under Threat)

आसिफ मर्चेंट ने कोर्ट को बताया कि वह अपनी मर्जी से इस साजिश में शामिल नहीं हुआ था:

ईरानी हैंडलर का दबाव: मर्चेंट ने दावा किया कि तेहरान में रहने वाले उसके परिवार (पत्नी और बच्चों) को ईरानी खुफिया एजेंटों ने बंधक जैसी स्थिति में रखा था।

खौफनाक मुलाकात: उसने बताया कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के एक सदस्य, मेहरदाद यूसुफ (Mehrdad Yousef), ने उसके घर आकर उसे धमकाया था। मर्चेंट के अनुसार, यूसुफ ने उसे स्पष्ट किया था कि यदि वह अमेरिका में इस काम को अंजाम नहीं देता, तो उसके परिवार का अंजाम बुरा होगा।

2. तीन बड़े नाम: ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली

कोर्ट में पेश किए गए सबूतों और मर्चेंट की गवाही से पता चला कि इस साजिश के निशाने पर कौन-कौन थे:

मर्चेंट ने गवाही दी कि उसके ईरानी हैंडलर ने उसे किसी एक व्यक्ति का नाम नहीं दिया था, बल्कि तीन प्रमुख नेताओं के नाम सुझाए थे: डोनाल्ड ट्रंप, जो बाइडेन और निक्की हेली

सर्च हिस्ट्री: अभियोजकों ने खुलासा किया कि मर्चेंट के लैपटॉप से ट्रंप की रैलियों की लोकेशन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारियों की सर्च हिस्ट्री मिली है।

3. 'मेकशिफ्ट' हिटमैन और $5,000 का भुगतान

मर्चेंट ने स्वीकार किया कि उसने हत्यारों (हिटमैन) को काम पर रखने के लिए $5,000 (लगभग 4.25 लाख रुपये) का एडवांस भुगतान किया था।

फर्जी हत्यारे: मर्चेंट जिन्हें 'माफिया' समझकर पैसे दे रहा था, वे वास्तव में अमेरिकी एफबीआई (FBI) के अंडरकवर एजेंट थे।

नाकाम साजिश: मर्चेंट ने कोर्ट में कहा, "मुझे पता था कि मैं सफल नहीं हो पाऊंगा। मैं बस अपने परिवार को बचाने के लिए नाटक कर रहा था और पकड़े जाने के लिए मानसिक रूप से तैयार था।"

4. अभियोजन पक्ष का पलटवार (Prosecution's Argument)

सरकारी वकीलों ने मर्चेंट के 'मजबूरी' वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया है:

उन्होंने तर्क दिया कि मर्चेंट ने पकड़े जाने से पहले कभी भी अमेरिकी कानून प्रवर्तन एजेंसियों से मदद नहीं मांगी।

अभियोजकों का कहना है कि मर्चेंट एक प्रशिक्षित ऑपरेटिव की तरह काम कर रहा था और उसने खुद 'काउंटर-सर्वेक्षण' (Countersurveillance) की तकनीकें सीखी थीं।

5. ईरान का आधिकारिक रुख

तेहरान ने शुरू से ही इन आरोपों को 'हास्यास्पद' और 'प्रोपेगेंडा' बताया है। ईरान का कहना है कि वह किसी भी देश के नेताओं की हत्या की साजिश में शामिल नहीं है, हालांकि उसने जनरल कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने की बात हमेशा दोहराई है।